international van mela bhopal: लाल परेड मैदान में रविवार को जब अंतर्राष्ट्रीय वन मेले का शुभारंभ हुआ, तो मंच से सिर्फ एक कार्यक्रम की शुरुआत नहीं हुई, बल्कि भारतीय परंपरा और प्रकृति के साथ जुड़े विश्वास की भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मेले का उद्घाटन करते हुए कहा कि कोविड जैसी वैश्विक महामारी के समय आयुर्वेद ने पूरी दुनिया को चौंका दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कोरोना के दौर में हर तरफ डर और असमंजस का माहौल था, तब भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति लोगों के काम आई। उनके शब्दों में, जब दुनिया परेशान थी, तब आयुर्वेद ने कमाल कर दिखाया। काढ़ा जब सामने आया, तो लोगों को इसकी ताकत का एहसास हुआ।
international van mela bhopal: आयुर्वेद केवल इलाज नहीं, जीवनशैली है
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद को केवल इलाज की पद्धति न मानकर एक संपूर्ण जीवनशैली बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवनचर्या में जड़ी-बूटियां हमेशा से शामिल रही हैं। यही कारण है कि प्राकृतिक आहार और औषधियां शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखती हैं। मुख्यमंत्री ने चारों आश्रमों का उल्लेख करते हुए जंगल और ऋषि परंपरा के गहरे संबंधों पर भी प्रकाश डाला।
international van mela bhopal: उज्जैन में भी आयोजित होगा वन मेला
वन राज्यमंत्री दिलीप अहिरवार ने समारोह में बताया कि जल्द ही उज्जैन में भी वन मेले के आयोजन की घोषणा की जाएगी। भोपाल के इस मेले में 200 से अधिक आयुर्वेदिक चिकित्सक और विशेषज्ञ निःशुल्क परामर्श दे रहे हैं।
350 स्टॉल, 24 राज्यों की भागीदारी
इस बार मेला ‘समृद्ध वन, खुशहाल वन’ थीम पर आयोजित किया गया है और यह 23 दिसंबर तक चलेगा।
मेले में देश के 24 राज्यों से आए प्रतिभागी शामिल हुए हैं। कुल 350 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें-जड़ी-बूटियां, आयुर्वेदिक औषधियां, वन धन केंद्रों के उत्पाद, पारंपरिक खाद्य सामग्री, लोगों को आकर्षित कर रही हैं। मेले में दाल-पानिया, गोंडी जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी लोग ले पा रहे हैं।
