खेल सिर्फ टेक्नोलॉजी का नहीं, अब सत्ता और सुरक्षा का भी है

अमेरिका की सरकार ने इंटेल जैसी दिग्गज टेक कंपनी में सीधे तौर पर 10% हिस्सेदारी ले ली है। सुनने में ये एक सामान्य बिज़नेस डील लग सकती है, लेकिन इसके पीछे की कहानी कहीं ज़्यादा दिलचस्प और रणनीतिक है। सरकार पैसा नहीं दे रही, बल्कि दांव लगा रही है और वो भी दुनिया की सबसे संवेदनशील इंडस्ट्री में।
क्या मिला इंटेल को बदले में? सीधा 8 अरब डॉलर की सब्सिडी
अमेरिकी कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक ने ट्वीट करते हुए लिखा,
Intel अब अमेरिका की 10% सरकारी हिस्सेदारी वाली टेक कंपनी है। यह हमारे चिप मैन्युफैक्चरिंग लीडरशिप और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए मील का पत्थर है।
इस सौदे के तहत इंटेल को CHIPS एक्ट 2022 के तहत 8 बिलियन डॉलर (लगभग ₹66,000 करोड़) की फंडिंग दी जा रही है। इसमें से 2.2 बिलियन डॉलर पहले ही जारी किए जा चुके हैं, बाकी रकम अब सीधे कंपनी के शेयरों में निवेश के रूप में दी जाएगी।
ट्रम्प का तंज CEO सिर्फ नौकरी बचाने आए थे!
इंटेल के CEO लिप-बू टैन की हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से एक मुलाकात हुई। ट्रम्प का बयान अब सुर्खियों में है
वो (CEO) अपनी नौकरी बचाने आए थे… मगर 10 अरब डॉलर छोड़ गए। मेरे लिए यह एक शानदार डील है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि उन्हें इंटेल CEO के चीन से कथित संबंधों पर संदेह था, और उन्होंने इस्तीफे की बात तक कह दी थी।
क्यों है यह सौदा इतना अहम?
इंटेल, अमेरिका की आखिरी बड़ी चिप मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है, जो घरेलू स्तर पर अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर्स बना सकती है। लेकिन पिछले कुछ सालों में यह कंपनी AI चिप्स रेस में Nvidia और AMD से पिछड़ती जा रही है।
वहीं, ओहायो में इंटेल की मेगा फैक्ट्री में भी देरी हो रही है, जिसे ट्रम्प प्रशासन खास रणनीतिक परियोजना मानता है राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू टेक सप्लाई चेन दोनों के लिहाज से।

इस हिस्सेदारी से सरकार को कंपनी की रणनीतिक दिशा पर प्रभाव, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स की प्राथमिकता, चिप मैन्युफैक्चरिंग को अमेरिका में ही बनाए रखने की गारंटी मिलेगी
शेयर बाजार में धमाका, लेकिन भविष्य अनिश्चित
सरकार की हिस्सेदारी की खबर के बाद इंटेल का शेयर 7% तक उछल गया और $25 के पार पहुंच गया। हालांकि, दिन के अंत में ये थोड़ी गिरावट के साथ $24.80 पर बंद हुआ। पिछले 5 सालों में कंपनी का शेयर 49.68% गिरा है, यानी निवेशकों को आधा रिटर्न भी नहीं मिला।
इंटेल की चुनौतियां: छंटनी, कटौती और प्रोजेक्ट्स रद्द
सरकार से 8 अरब डॉलर मिलने के बावजूद इंटेल की स्थिति अभी भी हिचकोले खा रही है। इस साल 24,000 कर्मचारियों की छंटनी की योजना है, जर्मनी और पोलैंड में प्रोजेक्ट्स रद्द हो गए, लगातार घटता मार्केट शेयर और प्रॉफिट मार्जिन से यह सौदा कंपनी को जीवनदान जरूर दे सकता है, लेकिन इंटेल को खुद को फिर से खड़ा करना होगा तकनीक, उत्पाद और भरोसे के स्तर पर।
क्या यह अमेरिका की चीन से चिप वॉर में चाल है?
जैसे-जैसे अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी वॉर बढ़ रही है, सेमीकंडक्टर्स सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। चीन TSMC और SMIC पर दांव लगा रहा है, तो अमेरिका अब इंटेल पर सीधा दांव खेल रहा है और वो भी हिस्सेदारी लेकर। यह एक सामान्य सब्सिडी नहीं यह एक रणनीतिक साझेदारी है।
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