जब लहरों ने भारत की ताक़त को सलाम किया
26 अगस्त का दिन भारत की सैन्य ताक़त के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। दो आधुनिक और स्वदेशी युद्धपोत – INS उदयगिरि और INS हिमगिरि – भारतीय नौसेना का हिस्सा बन गए। लेकिन यह सिर्फ दो जहाजों की कहानी नहीं है। ये दो प्रतीक हैं आत्मनिर्भर भारत, तकनीकी नवाचार और समंदर में भारतीय शौर्य के।

कभी आपने किसी फौजी की आँखों में वो चमक देखी है जब वह कहता है, “अब हम किसी पर निर्भर नहीं हैं”? बस वैसा ही है ये क्षण, जब भारत ने दुश्मनों को बिना कुछ कहे सख़्त संदेश भेज दिया।
INS उदयगिरि और हिमगिरि: तकनीक और परंपरा का अद्भुत मेल
INS उदयगिरि और INS हिमगिरि सिर्फ स्टील और मिसाइलों का ढांचा नहीं हैं। ये आधुनिक भारत की सोच, वैज्ञानिकों की मेहनत और हमारे समुद्री योद्धाओं की उम्मीदों से बने हैं।
- स्टेल्थ तकनीक: ऐसे डिज़ाइन किए गए हैं कि दुश्मनों के रडार, इंफ्रारेड या सोनार इनका पता न लगा सकें। यानी जब ये आएंगे, दुश्मन को पता भी नहीं चलेगा।
- ब्रह्मोस और बराक-8 मिसाइलें: भारत-रूस और भारत-इज़राइल की ताक़त का संगम। दुश्मनों को हवा से, पानी से और समुद्र के नीचे से भी जवाब देने में सक्षम।
- स्वदेशी निर्माण: एक बना कोलकाता के गार्डन रीच में और दूसरा मुंबई के मझगांव डॉक में। यही है Make in India की असली ताक़त।
- नाम में भावनाएं: उदयगिरि – आंध्रप्रदेश की पर्वत श्रृंखला। हिमगिरि – पुराने INS हिमगिरि की विरासत। दोनों नाम हमारे प्राकृतिक गौरव और इतिहास से जुड़े हैं।
ये सिर्फ जहाज़ नहीं, भरोसे की ढाल हैं
क्या आप जानते हैं कि अब भारत की नौसेना 135+ युद्धपोतों के साथ एशिया की सबसे शक्तिशाली ताक़तों में एक है? 2035 तक यह संख्या 175 पार करने की योजना है।

इन जहाजों का तैनाती क्षेत्र होगा इंडो-पैसिफिक, जहाँ चीन और अन्य शक्तियों की गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं। ऐसे में INS उदयगिरि और हिमगिरि जैसे जहाज भारत को एक मज़बूत रणनीतिक बढ़त देते हैं।
एक नौसैनिक की आँखों से देखिए ये पल
“जब मैंने पहली बार INS हिमगिरि पर कदम रखा, मुझे लगा जैसे मैं भारत के भविष्य पर कदम रख रहा हूँ,” – ये शब्द हैं कमांडर राजीव कुमार के, जो इस जहाज़ की टीम का हिस्सा हैं।
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