indus water treaty crisis 2025 : एक ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद भी चिट्ठियाँ, भारत ने डैम के गेट बंद किए
indus water treaty crisis 2025 : कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई के बीच भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित कर पाकिस्तान को एक स्पष्ट संदेश दे दिया। नतीजा? अब पाकिस्तान पानी के लिए भारत से गुहार लगा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय ने भारत को चार आधिकारिक पत्र भेजे हैं। इनमें से एक पत्र ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी भेजा गया, जिसमें पानी की सप्लाई बहाल करने की अपील की गई है।
📩 पाकिस्तान के खत : NDTV रिपोर्ट का खुलासा
NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये पत्र सैयद अली मुर्तजा, सचिव, जल संसाधन मंत्रालय, पाकिस्तान द्वारा भारत के जल शक्ति मंत्रालय को भेजे गए। बाद में इन्हें भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) को अग्रेषित किया गया।
इनमें चिनाब और झेलम नदियों के गिरते जल स्तर को लेकर चिंता जताई गई है और भारत से आग्रह किया गया है कि वह बगलिहार और सलाल डैम के गेट खोल दे।
🌊 भारत ने क्यों रोका पानी?
👉 22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमला हुआ था, जिसमें भारतीय जवान शहीद हुए थे।
👉 23 अप्रैल को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया:
“भारत सरकार ने निर्णय लिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमापार आतंकवाद को रोकने की साफ और स्थायी गारंटी नहीं देता, तब तक सिंधु जल संधि को स्थगित रखा जाएगा।”
इस बयान के बाद ही भारत ने बगलिहार और सलाल डैम के गेट बंद कर दिए, जिससे पाकिस्तान की चिनाब और झेलम नदियों में जलप्रवाह कम हो गया।
📚 क्या है सिंधु जल संधि?
साल 1960 में भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में समझौता हुआ था। इसे ही इंडस वाटर ट्रीटी कहा जाता है।
समझौते की प्रमुख बातें:
- सिंधु नदी प्रणाली की 6 नदियां: सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज
- पूर्वी नदियां (रावी, ब्यास, सतलुज): भारत के उपयोग में
- पश्चिमी नदियां (सिंधु, झेलम, चिनाब): पाकिस्तान को दी गईं
हालांकि भारत को पश्चिमी नदियों पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स बनाने का अधिकार मिला था, लेकिन बिना पानी रोकने के।
📍 जल संकट में पाकिस्तान: क्यों है इतनी बेचैनी?
भारत के डैम गेट बंद करने से पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में जल संकट गहरा गया है। चिनाब नदी का जलस्तर गिरने से:
- सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है
- खेती पर असर पड़ रहा है
- पाकिस्तान की 17 लाख एकड़ ज़मीन सूखने की कगार पर है
- आम जनता को पीने के पानी की किल्लत हो रही है
🌍 सिंधु नदी प्रणाली का 47% हिस्सा पाकिस्तान, 39% भारत, 8% चीन और 6% अफगानिस्तान में आता है।
🕰️ इतिहास से अब तक: सिंधु जल विवाद की संक्षिप्त झलक
| वर्ष | घटनाक्रम |
|---|---|
| 1947 | भारत-पाक बंटवारे के बाद ‘स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट’ |
| 1948 | भारत ने दो मुख्य नहरों का पानी रोक दिया |
| 1951-1960 | विश्व बैंक की मध्यस्थता में वार्ता |
| 19 सितंबर 1960 | कराची में ‘सिंधु जल संधि’ पर हस्ताक्षर |
🧨 ऑपरेशन सिंदूर के बाद भेजी गई चिट्ठी का महत्व
ऑपरेशन सिंदूर, जिसमें भारत ने सीमा पार आतंकियों के ठिकानों पर हमला किया, उसके बाद भी पाकिस्तान ने भारत को एक पत्र लिखा। यह इस बात को दर्शाता है कि पाकिस्तान की स्थिति इतनी नाजुक हो चुकी है कि वह अब राजनीतिक मतभेदों के बावजूद पानी की अपील करने को मजबूर है।
🇮🇳 भारत का रुख: “पानी वहीं जाएगा, जहां विश्वास होगा”
भारत का स्पष्ट संदेश है – जब तक पाकिस्तान:
- आतंकियों को समर्थन बंद नहीं करता
- सीमा पार आतंकी हमलों को नहीं रोकता
- भारत के साथ विश्वास बहाल नहीं करता
तब तक सिंधु जल संधि पर पुनर्विचार नहीं होगा।
🔚 सिंधु जल संधि की पुनर्रचना या पूर्ण विराम?
भारत ने फिलहाल संधि को स्थगित किया है, रद्द नहीं। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भविष्य में पाकिस्तान के व्यवहार पर ही यह निर्भर करेगा कि संधि की बहाली होगी या नई जल नीति तैयार की जाएगी।
✍️ क्या सिंधु जल संधि अब बीते समय की बात होगी?
✉️ क्या पाकिस्तान अब पानी को कूटनीति से सुलझाएगा या साजिश से?
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