Indore Mother Milk Bank: 1000 से ज़्यादा बच्चों को मिला जीवनदान
Indore Mother Milk Bank: जब कोई मां अपने नवजात को दूध नहीं पिला पाती, तो एक और मां का ममत्व ही उस बच्चे की जान बचा सकता है। मध्यप्रदेश के इंदौर में बना राज्य का पहला ‘मदर मिल्क बैंक’ इसी भावना का जीवंत उदाहरण है। सरकारी एमटीएच (महाराजा तुकोजीराव हॉस्पिटल) में शुरू हुए इस सेंटर से अब तक 1000 से ज्यादा नवजातों को जीवनदान मिल चुका है।
210 लीटर दूध दान, 1000 से ज्यादा बच्चों की जान बची
साल 2023 में शुरू हुए इस मदर मिल्क बैंक में अब तक 1000 से ज्यादा माताओं ने करीब 210 लीटर दूध दान किया है। यह दूध उन नवजातों को दिया गया जिन्हें अपनी मां का दूध नहीं मिल पा रहा था – जैसे प्री-मैच्योर बेबी, बीमार या अनाथ बच्चे।
एमटीएच के आंकड़ों के अनुसार, मदर मिल्क बैंक शुरू होने के बाद से नवजात मृत्यु दर 25% से घटकर करीब 11% तक आ चुकी है, जो किसी भी मेडिकल प्रयास के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
ऐसे काम करता है मदर मिल्क बैंक?
यह बैंक ब्लड बैंक की तर्ज पर काम करता है। पहले माताओं की काउंसलिंग की जाती है, फिर वे अतिरिक्त दूध दान करती हैं। इस दूध को प्रोसेस और स्टोर किया जाता है, फिर डॉक्टर की सिफारिश पर जरूरतमंद नवजात को दिया जाता है। इससे न केवल पोषण मिलता है, बल्कि नवजातों को इंफेक्शन से भी बचाया जा सकता है।
पूरे देश के लिए रोल मॉडल
यह बैंक केवल मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के ज़रूरतमंद नवजातों की भी मदद कर रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, जल्द ही इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है।
एमटीएच के नोडल अधिकारी डॉ. सुनील आर्य कहते हैं,
“अगर हर राज्य में ऐसा एक मदर मिल्क बैंक हो जाए, तो देश में नवजात मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।”
दूसरी मां का दूध, किसी और के बच्चे की जान
इंदौर की कई महिलाएं इस नेक काम में बिना किसी अपेक्षा के हिस्सा ले रही हैं। वे जानती हैं कि उनका दूध किसी ऐसे बच्चे को जीवन दे सकता है, जिसकी मां नहीं रही या दूध नहीं बन रहा।
क्या है सरकार की योजना?
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) और एमजीएम मेडिकल कॉलेज की सहायता से शुरू हुआ यह बैंक अब पूरे प्रदेश में फैलाने की तैयारी में है। इसके लिए बजट, इंफ्रास्ट्रक्चर और काउंसलिंग यूनिट्स को मजबूत किया जा रहा
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