इंदौर में रविवार को 13 साल के मुनिराज विजयचंद्र सागर ने श्रद्धालुओं के सवालों के जवाब दिए। उनसे करीब 100 सवाल पूछे गए। उन्होंने सभी सवालों को याद रखा और 100 सवाल पूरे होने के बाद उनका एक-एक कर जवाब दिया। उनकी ये प्रतिभा देखकर वहां मौजूद सभी दर्शक हैरान रह गए। इतना ही नहीं उन्होंने उल्टे क्रम के साथ ही रेंडम क्रम भी उन्हीं सवालों को दोहराया जो लोगों ने उनसे पूछे थे।
श्रद्धालुओं ने लगाई सवालों की झड़ी
श्रद्धालुओं ने उनसे पूछा भगवान मल्लिनाथ का जन्म कहां. शंखेश्वर तीर्थ कहा पर स्थित है? पंच परावर्तन क्या है? जैसे कई सवाल पूछे। इन सवालों के साथ नदियों, पर्वतों, राज्यों, राजधानियों सहित गणित के सवाल भी इसमें शामिल थे। इन सभी सवालों को सून कर उन्होंने याद रखा और 100 सवाल पूरे होने के बाद इन्हीं सवालों को दोहराया। बता दे कि बाल मुनि से 100 सवाल पूछने में करीब 2 घंटे 7 मिनट का समय लगा। जबकि उन्हें दोहराने और जवाब देने में 12 मिनट 7 सेकेंड का समय लगा। यहां पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के सदस्य भी मौजूद रहे। जिन्होंने पूरे आयोजन को देखा और आयोजन की समाप्ति पर बाल मुनि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड दिया गया।
मिला गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड
यहां आने वाले सभी लोगों को एक नोटबुक एवं पेन सहित एक किट दी, ताकि वे बाल मुनि से पूछे जाने वाले सवालों को क्रमवार नोट कर लें और जब वे उत्तर दें तो सही या गलत जवाब का मिलान कर सकें। शुरूवात में उनसे भगवान मल्लिनाथ का जन्म कहा हुआ, शंखेश्वर तीर्थ कहा स्थित है, धर्म क्या है सहित पर्वत, नदियों, राज्यों, राजधानी आदि के नाम लिए गए। जिन्हें लोगों ने अपनी-अपनी नोटबुक में नोट भी किया। इसके अलावा गणित के सवाल, कुछ वस्तुएं उन्हीं दिखाई, कुछ फोटो उन्हें दिखाए।
अलग-अलग तरह के 100 सवाल
इस तरह अलग-अलग तरह के 100 सवाल बाल मुनि के सामने पूछे। करीब 2 घंटे 7 मिनट में लोगों ने बालमुनि से 100 सवाल पूछे। इन 100 सवालों को पूछने के दौरान बालमुनि ने इस सभी सवालों को अपनी स्मृति में रखा और सवाल खत्म होने के बाद उन्होंने 12 मिनट 7 सेकेंड में इन सभी सवालों को वापस दोहराया। जिसे वहां मौजूद लोगों ने अपनी नोटबुक में चेक भी किया। हर एक सवाल सही निकलने पर वहां मौजूद दर्शक चौक गए और तालियों और जयकारों से पूरा हॉल गूंज उठा। इधर, आयोजन के दौरान एक महिला की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तुरंत उपचार दिया गया।

10 साल की उम्र में ली दीक्षा
बाल मुनि विजयचंद्र सागर का जन्म कोटा (राजस्थान) में हुआ है और उनके परिवारजनों का कहना है कि उन्होंने जब से बोलना सीखा, तब से पहला शब्द दीक्षा बोला और मात्र 8 वर्ष की आयु में उन्होंने अपने गुरु का हाथ पकड़ लिया। उनकी शिक्षा कर्नाटक के मैसूर में हुई और दस वर्ष की उम्र में उन्होंने दीक्षा ग्रहण की। इतनी कम उम्र से ही उनकी दिलचस्पी जिनशासन के प्रति लगातार बढ़ती रही। तिलकेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ धार्मिक पारमार्थिक सार्वजनिक न्यास एवं सरस्वती साधना रिसर्च फाउंडेशन अहमदाबाद के संयुक्त तत्वावधान में प.पू. जैनाचार्य नयचंद्र सागर सूरीधर म.सा. की पावन निश्रा में 29 शिष्य इन दिनों चातुर्मास के लिए तिलक नगर उपाश्रय इंदौर में विराजमान हैं।
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