मध्यप्रदेश के इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड में अब एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि जिस जले हुए अवशेष को पुलिस एक बच्चे का शव मानकर पोस्टमार्टम के लिए ले गई थी, वह वास्तव में सोफे का जला हुआ फोम था।इस खुलासे के बाद जांच प्रक्रिया और घटनास्थल पर शुरुआती कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
8 लोगों की हुई थी मौत
इस हादसे में कुल 8 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में मनोज पुगलिया, उनकी बहू सिमरन, विजय सेठिया, सुमन सेठिया, रुचिका उर्फ टीनू, कार्तिक, राशि और 8 वर्षीय तनय शामिल हैं। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई शव बुरी तरह झुलस गए, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, मासूम तनय के शरीर का केवल एक पैर ही बरामद हो पाया है, जबकि बाकी अवशेष अब तक नहीं मिले हैं। इस कारण फोरेंसिक टीम ने एक बार फिर घटनास्थल पर तलाश शुरू कर दी है।
करंट से नहीं, धुएं और आग से हुई मौत
रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी मृतक की मौत करंट लगने से नहीं हुई। सभी की मौत जहरीले धुएं और आग की लपटों के कारण हुई। वहीं, दो लोगों की मौत का कारण कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का प्रभाव बताया गया है। परिवार के अनुसार मृतक सिमरन गर्भवती थीं, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इस विरोधाभास ने जांच को और जटिल बना दिया है।
सीएम ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस अब उस प्रत्यक्षदर्शी की तलाश कर रही है, जिसने सबसे पहले आग की सूचना दी थी।यह पूरा मामला न केवल एक बड़ी त्रासदी है, बल्कि आपदा के समय जांच और पहचान प्रक्रिया में सतर्कता की आवश्यकता को भी उजागर करता है।
