Indore contaminated water deaths: देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाने वाला इंदौर आज अपने ही सिस्टम से जूझ रहा है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अब तक 5 माह के मासूम सहित 14 लोगों की जान चली गई है. 150 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं और हर घर में डर का माहौल है।
Indore contaminated water deaths: अस्पताल पहुंचे सीएम
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार को इंदौर पहुंचे. उन्होंने वर्मा नर्सिंग होम जाकर भर्ती मरीजों से मुलाकात की, उनका हालचाल जाना और डॉक्टरों से इलाज की स्थिति पर चर्चा की. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इलाज और राहत में कोई कमी नहीं छोड़ेगी।
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Indore contaminated water deaths: हाईकोर्ट ने दिखाई सख्ती
इस पूरे मामले पर इंदौर हाईकोर्ट की बेंच ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार से 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं. इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इंसानी ने जनहित याचिका दाखिल कर शहरवासियों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की थी। कोर्ट ने माना कि हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और प्रशासनिक जवाबदेही तय होना जरूरी है।
दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हो रही मौतों को लेकर हाईकोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं।
एक याचिका रितेश इंसानी ने
दूसरी स्थानीय निवासी राहुल गायकवाड़ ने दाखिल की
कोर्ट को बताया गया कि इलाके में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने घटना की जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति बनाई है। इसमें पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा, जयवर्धन सिंह, बदनावर विधायक भंवर सिंह शेखावत, तराना विधायक महेश परमार और सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल शामिल हैं।
सवालों पर भड़के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय
एमजीएम मेडिकल कॉलेज में बैठक के बाद जब एनडीटीवी के पत्रकार ने पीड़ितों को मुआवजा और पेयजल व्यवस्था को लेकर सवाल किया, तो मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नाराज हो गए। उन्होंने सवाल को फोकट बताकर टाल दिया। इस पर पत्रकार ने आपत्ति जताई। बातचीत का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और सत्ता के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं।
