वीडियो में दिखा इंसानियत का टेस्ट, सोशल मीडिया पर बवाल
1 अगस्त की शाम इंडिगो की मुंबई कोलकाता फ्लाइट पर कुछ ऐसा हुआ जिसने लाखों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया जब किसी को मदद चाहिए थी, तब उसे समझ नहीं थप्पड़ मिला। यह घटना सिर्फ एक थप्पड़ की कहानी नहीं है, यह उस भावनात्मक शून्यता की तस्वीर है जो हम सबके आसपास तेजी से फैल रही है।

वायरल वीडियो में दिखा इंसानी संवेदनाओं का पतन
एक मुस्लिम युवक, जो शायद अपने डर से लड़ रहा था, उसे पैनिक अटैक आया। वो सीट से उठकर गैलरी में आया, बेचैन था, घबराया हुआ था। एयर होस्टेस उसे शांत कराने की कोशिश कर रही थीं।
तभी अचानक पीछे बैठा एक यात्री उठता है और उसे ज़ोरदार थप्पड़ जड़ देता है। उस पल के बाद वीडियो में जो दिखा, वो दिल तोड़ने वाला था पीड़ित युवक और ज़्यादा पैनिक में चला गया, वह ज़ोर ज़ोर से रोने लगा। आसपास मौजूद लोग दंग रह गए।
किसी ने चिल्लाकर पूछा “आपने ऐसा क्यों किया?” उत्तर मिला मुझे परेशानी हो रही थी… क्या कोई इंसान किसी दूसरे की पीड़ा से इतना असहज हो सकता है कि उसे थप्पड़ मार दे?
जब यात्री ने विरोध किया
थप्पड़ मारने वाले शख्स को जैसे ही बाकी यात्रियों ने घेरा, आवाज़ें आने लगीं ये क्या कर रहे हो! आपको ऐसा करने का क्या हक़ है? एयर होस्टेस ने भी कड़ा रुख अपनाया। पैनिक अटैक झेल रहे युवक को एक सुरक्षित सीट पर बैठाया गया, और आरोपी की सीट भी बदल दी गई। फ्लाइट कोलकाता पहुंचते ही, थप्पड़ मारने वाले यात्री को सुरक्षाकर्मियों को सौंप दिया गया।

इंडिगो की प्रतिक्रिया माफी और सख्ती
इंडिगो ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा
“हमारे यात्रियों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। इस तरह का बर्ताव पूरी तरह अस्वीकार्य है।”
एयरलाइन ने आश्वासन दिया कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी अपनाई जाएगी।
पैनिक अटैक क्या होता है? क्यों समझना ज़रूरी है?
पैनिक अटैक एक मानसिक स्वास्थ्य समस्या है, जो किसी भी समय किसी को भी हो सकती है। इसके लक्षणों में तेज़ धड़कन, सांस फूलना, पसीना, घबराहट और नियंत्रण खोने का डर शामिल है। ऐसे में समझदारी, सहानुभूति और मदद की ज़रूरत होती है न कि झुंझलाहट और हिंसा की।
सोशल मीडिया पर फूटा ग़ुस्सा
इस वीडियो के वायरल होते ही ट्विटर और इंस्टाग्राम पर लोग बिफर पड़े। कुछ कमेंट्स में कहा गया: वो आदमी बीमार था, न कि बदतमीज़। थप्पड़ मारने वाले को आजीवन फ्लाइट से बैन करो! मानसिक स्वास्थ्य को इतना हल्के में लेना घातक है।
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