देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त अव्यवस्था की चपेट में थी। चार दिनों में 1,200 से ज्यादा उड़ानें रद्द होने के बाद यात्रियों में नाराजगी चरम पर पहुँच गई। दबाव बढ़ा तो शुक्रवार को DGCA ने एक बड़ा यू-टर्न लिया और एयरलाइंस को अस्थायी राहत देते हुए नए वीकली रेस्ट नियमों को फिलहाल 10 फरवरी 2026 तक के लिए स्थगित कर दिया। इस फैसले के बाद अब पायलटों और केबिन क्रू को 48 घंटे की जगह पहले की तरह 36 घंटे का साप्ताहिक आराम दिया जाएगा। इंडिगो का कहना है कि DGCA द्वारा लागू किए गए कड़े नियमों के कारण स्टाफ की उपलब्धता कम हो गई थी, जिससे ऑपरेशंस चरमराने लगे।

नया नियम और इंडिगो की मुश्किलें
DGCA ने 1 नवंबर से FDTL (Flight Duty Time Limitation) के दूसरे चरण को लागू किया था। इसके तहत हर क्रू मेंबर को हफ्ते में लगातार 48 घंटे का वीकली रेस्ट देना जरूरी था। छुट्टियों (leave) को वीकली रेस्ट में जोड़ने की मनाही थी। लगातार नाइट ऑपरेशंस पर भी कई प्रतिबंध लगाए गए थे। यह नियम पायलटों की थकान को कम करने के लिए बनाया गया था, लेकिन इंडिगो का तर्क है कि अचानक इतनी सख्ती ने उपलब्ध पायलटों की संख्या घटा दी और फ्लाइट ऑपरेशन बाधित होने लगे।
DGCA का ताजा फैसला में क्या बदल?
सरकार ने दबाव और अव्यवस्था देखते हुए इंडिगो सहित सभी एयरलाइंस को 10 फरवरी 2026 तक अस्थायी छूट दे दी है छुट्टी और वीकली रेस्ट फिर से जोड़े जा सकेंगे, इससे एक ही पायलट ज्यादा दिनों तक उपलब्ध रहेगा । नाइट ड्यूटी पर लगी पाबंदियां नरम हुईं हैं पायलट पहले की तरह रात में 6 उड़ानें तक कर सकेंगे।
उड़ानों की रद्दीकरण की श्रृंखला टूटेगी, ऑपरेशन स्थिर होंगे और स्टाफ की उपलब्धता बढ़ेगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, पायलटों की थकान एविएशन सेक्टर में कई हादसों का कारण रही है। इसलिए DGCA को अब सरप्राइज ऑडिट, रोस्टर की सख्त निगरानी करनी होगी ताकि सुरक्षा से समझौता न हो।
क्या फैसला तात्कालिक दबाव में लिया गया?
कई एविएशन विशेषज्ञों का मानना है कि नियम वापसी का फैसला तकनीकी से अधिक संकट प्रबंधन जैसा दिखता है। जहाँ DGCA का लक्ष्य क्रू की थकान कम करना था, वहीं इंडिगो इसका सबसे बड़ा प्रभावित पक्ष बन गया। बढ़ती शिकायतों, एयरपोर्ट्स पर लंबी कतारों और व्यापक यात्रा अव्यवस्था को देखकर सरकार ने अस्थायी ढील देना ही बेहतर समझा।
