एफआईआई की बिकवाली से निवेशकों में घबराहट
indian stock market falls loss: मुंबई, भारतीय शेयर बाजार इस हफ्ते फिर लाल निशान पर बंद हुए। लगातार दूसरे सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारी बिकवाली और वैश्विक संकेतों में कमजोरी के कारण निफ्टी 0.71% गिरकर 25,492 और सेंसेक्स 1.65% फिसलकर 83,216 पर बंद हुआ। पिछले कुछ सत्रों से बाजार में जिस तरह की अस्थिरता देखी जा रही है, उसने निवेशकों की धारणा पर गहरा असर डाला है। आईटी, मेटल और ऑटो सेक्टर में भारी दबाव के चलते निफ्टी 50 के अधिकांश शेयर नुकसान में रहे।

वैश्विक संकेत और एफआईआई का बहिर्वाह
जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर होने से वैश्विक निवेशक सतर्क हैं। इसके साथ ही यूरोप और एशिया के बाजारों में आई सुस्ती ने भारतीय इक्विटी पर असर डाला है। नायर के मुताबिक,
आईटी और मेटल सेक्टर की कमजोरी के साथ एफआईआई की लगातार बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ा दिया। हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSU Banks) बेहतर नतीजों और एफडीआई सीमा बढ़ाने की उम्मीदों के चलते थोड़े समर्थन में रहे।
वास्तव में, अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से ही एफआईआई लगातार भारतीय बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का प्रीमियम वैल्यूएशन अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले अधिक है, इस वजह से विदेशी निवेशक फिलहाल सस्ते एशियाई बाजारों की ओर रुख कर रहे हैं।
घरेलू संकेतक और सेक्टोरल ट्रेंड
सप्ताह के दौरान निफ्टी बैंक और एफएमसीजी शेयरों में हल्की तेजी दिखी, लेकिन ऑटो, मेटल और टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में बिकवाली हावी रही। विश्लेषकों का कहना है कि अधिकांश निफ्टी 50 कंपनियों के तिमाही नतीजे अनुमानों के अनुरूप रहे हैं, इसलिए गिरावट के बाद “बाय ऑन डिप्स रणनीति फिलहाल विवेकपूर्ण लगती है। फिलहाल, निफ्टी के लिए तकनीकी समर्थन 25,400 पर देखा जा रहा है, जबकि 25,600 पर मजबूत प्रतिरोध का स्तर बना हुआ है।
क्यों घट रहा है निवेशकों का भरोसा
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में कंपनियों की आय में तेजी से सुधार देखने के बावजूद वैल्यूएशन बहुत महंगे स्तर पर पहुंच गए हैं। निफ्टी अभी भी FY27 की अनुमानित आय के 20 गुना पी/ई पर ट्रेड कर रहा है, जो इसके 10-वर्षीय औसत से ऊपर है। ऐसे में, जब वैश्विक निवेशक अन्य बाजारों में सस्ते अवसर देख रहे हैं, तो भारत में एफआईआई का बिकवाली रुख जारी रहना स्वाभाविक है।
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