भारत और पाकिस्तान के अरब सागर में युद्धाभ्यास
आज से अरब सागर में भारतीय और पाकिस्तानी नौसेनाओं के बीच युद्धाभ्यास शुरू हो रहा है, और यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक घटना है। इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य न केवल दोनों देशों के सैन्य सामर्थ्य का परीक्षण करना है, बल्कि यह भी दिखाना है कि दोनों देश अपनी सीमाओं में शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। यह अभ्यास भारत-पाकिस्तान के बीच एक नई तनावपूर्ण स्थिति में आयोजित हो रहा है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के चार महीने बाद।

नौसेनाओं के युद्धाभ्यास का क्या है उद्देश्य?
भारत और पाकिस्तान दोनों ही अरब सागर में अपनी-अपनी नौसेनाओं के युद्धाभ्यास का आयोजन कर रहे हैं, लेकिन इन दोनों देशों का अभ्यास एक साथ शुरू हो रहा है। भारतीय नौसेना 11 और 12 अगस्त को गुजरात के पोरबंदर और ओखा के निकट युद्धाभ्यास करेगी, जबकि पाकिस्तान का अभ्यास लगभग 60 नॉटिकल मील दूर होगा। हालांकि, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि कौन से युद्धपोत इस अभ्यास में भाग लेंगे, लेकिन इसकी स्थिति काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
यह पहली बार है जब 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों ने अपनी-अपनी सीमाओं में शक्ति प्रदर्शन करने का फैसला किया है। यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बरकरार है, और ऐसे समय में युद्धाभ्यास के जरिए अपनी सैन्य ताकत को जाहिर करना उनकी प्राथमिकता हो सकती है।
ऑपरेशन सिंदूर और इसके बाद का असर
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 7 मई को आतंकियों के 9 ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की थी, जिसमें 100 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की खबरें थीं। इस स्ट्राइक में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के मुख्य ठिकाने भी निशाने पर थे। इस ऑपरेशन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया था, हालांकि दोनों देशों ने 10 मई को सीजफायर की घोषणा की थी, लेकिन युद्धाभ्यास इस तनाव के परिप्रेक्ष्य में एक नई ऊंचाई पर पहुंच चुका है।
मिसाइल परीक्षण और युद्धपोतों की तैनाती
भारतीय नौसेना ने 24 अप्रैल को अरब सागर में अपने युद्धपोतों से मिसाइलों का परीक्षण किया था। यह परीक्षण पूरी तरह सफल रहा, और भारतीय नौसेना ने इस बात का विश्वास दिलाया कि वह किसी भी समुद्री खतरे से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके अलावा, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय युद्धपोत INS सूरत को सूरत के हजीरा पोर्ट पर तैनात किया गया था, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत का प्रदर्शन किया गया।

इसके बाद 27 अप्रैल को भारतीय युद्धपोतों से मिसाइलों का एक और परीक्षण किया गया, जिसमें इन युद्धपोतों ने अत्याधुनिक हथियारों का उपयोग करके अपने लक्ष्य को भेदने में सफलता प्राप्त की। INS सूरत, जो कि एक 164 मीटर लंबा और 7,400 टन वजनी युद्धपोत है, इस परीक्षण में मुख्य रूप से शामिल था। यह युद्धपोत अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसमें ब्रह्मोस और बाराक-8 मिसाइल और एआई बेस्ड सेंसर सिस्टम हैं।
भारत की नई समुद्री ताकत: उदयगिरि और हिमगिरि युद्धपोत
26 अगस्त को भारतीय नौसेना में दो नए और अत्याधुनिक युद्धपोतों को शामिल किया जाएगा उदयगिरि (F35) और हिमगिरि (F34)। ये युद्धपोत भारतीय नौसेना के प्रमुख शिपयार्ड्स मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स में बनाए गए हैं। यह घटना भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी, क्योंकि ये दोनों युद्धपोत प्रोजेक्ट 17A (P17A) के तहत बनाए गए हैं और इसके जरिए भारतीय नौसेना की समुंदर में ताकत और भी मजबूत होगी।
पाकिस्तान की नौसेना का भी शक्ति प्रदर्शन
दूसरी ओर, पाकिस्तान भी अपनी नौसेना के अभ्यास में कोई कसर नहीं छोड़ने वाला है। पाकिस्तान ने अपनी सीमा में फायरिंग ड्रिल आयोजित करने की योजना बनाई है, जो इस बात का संकेत हो सकता है कि वे भी भारतीय सेना के सामने अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहते हैं। यह अभ्यास पाकिस्तान की सैन्य तैयारी को मजबूत करने के साथ-साथ भारत के साथ बढ़े हुए तनाव को और बढ़ाने का कारण बन सकता है।
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