Indian Constitution Day : भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। ऐसे में हर साल 26 नवंबर को देश में संविधान दिवस (Constitution Day) के रूप में मनाया जाता है। इसे राष्ट्रीय कानून दिवस (National Law Day) भी कहा जाता है। आज, 26 नवंबर 2025 को भारत अपना 76वां संविधान दिवस मना रहा है।
संविधान दिवस पर डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद समेत उन सभी महान विभूतियों का स्मरण करते हैं, जिन्होंने भारत के संविधान के निर्माण में अपना अहम योगदान दिया है। डॉक्टर बाबासाहेब अम्बेडकर की भूमिका को भी हम सभी याद करते हैं, जिन्होंने असाधारण दूरदृष्टि के साथ इस प्रक्रिया का निरंतर मार्गदर्शन किया। संविधान सभा में कई प्रतिष्ठित महिला सदस्य भी थीं, जिन्होंने अपने प्रखर विचारों और दृष्टिकोण से हमारे संविधान को समृद्ध बनाया।
कर्तव्यों का पालन करना सामाजिक-आर्थिक प्रगति का आधार
प्रधानमंत्री मोदी ने महात्मा गांधी के इस विश्वास को याद किया कि अधिकार कर्तव्यों के पालन से ही प्राप्त होते हैं. कर्तव्यों का पालन सामाजिक और आर्थिक प्रगति का आधार है. पीएम मोदी ने कहा कि आज ली गई नीतियां और निर्णय आने वाली पीढ़ियों के जीवन को आकार देंगे. उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वह अपने कर्तव्यों को सर्वोपरि रखें क्योंकि भारत एक विकसित भारत के विजन की ओर बढ़ रहा है.
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पीएम मोदी ने देशवासियों के नाम लिखा पत्र
इस अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने देशवासियों के नाम पत्र लिखा है। इसमें भारत के संविधान की महानता, जीवन में मौलिक कर्तव्यों का महत्त्व और हमें पहली बार मतदाता बनने का उत्सव क्यों मनाना चाहिए, ऐसे कई विषयों पर पीएम मोदी ने अपने विचार साझा किए हैं। गौरतलब है कि 2015 में पहली बार मोदी सरकार ने ही 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था।
- दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान: भारतीय संविधान विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान है। जब यह लागू हुआ था, तब इसमें 395 अनुच्छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां थीं।
- तैयारी में लगा समय: संविधान को तैयार करने में 2 साल, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा था।
- हस्तलिखित और सुलेखन: मूल संविधान को टाइप या प्रिंट नहीं किया गया था। इसे अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में हाथ से लिखा गया था।
- भारतीय सुलेखक: प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने इसे सुंदर इटैलिक शैली में अपने हाथों से लिखा था। उन्हें भारत के संविधान को हाथ से लिखने वाले सुलेखक के रूप में जाना जाता हैं।
- कलाकृतियों से सुसज्जित: संविधान के प्रत्येक पृष्ठ को शांतिनिकेतन के कलाकारों द्वारा, आचार्य नंदलाल बोस के मार्गदर्शन में, सजाया गया है। इन कलाकृतियों में भारतीय इतिहास और संस्कृति के विभिन्न चरणों का चित्रण है।
- अनेक देशों से प्रेरणा: भारतीय संविधान को बनाते समय दुनिया के कई अन्य देशों जैसे- अमेरिका, ब्रिटेन, आयरलैंड आदि के संविधानों की विशेषताओं को भी शामिल किया गया।
- सुरक्षित प्रतिलिपियां: संविधान की मूल हस्तलिखित प्रतियां भारतीय संसद के पुस्तकालय में हीलियम से भरे विशेष बक्सों में सुरक्षित रखी गई हैं।
