जानिए क्यों नहीं मिल पाएंगे घर के लोग?
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की धरती पर वापसी की उलटी गिनती शुरू हो गई है। वे अमेरिका की प्राइवेट स्पेस कंपनी Axiom Space के Axiom-4 मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) गए थे। 18 दिन के इस ऐतिहासिक मिशन के पूरा होने के बाद शुभांशु अब 15 जुलाई को वापस लौटेंगे। लेकिन सीधे घर नहीं जाएंगे—NASA की निगरानी में 7 दिन का विशेष रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम पूरा करने के बाद ही परिवार से मुलाकात होगी।
14 जुलाई को दोपहर 3 बजे होगी वापसी
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जानकारी दी कि शुभांशु शुक्ला और उनके साथी अंतरिक्ष यात्री 13 जुलाई को दोपहर 3 बजे पृथ्वी पर लैंड करेंगे। इस मिशन का अंडॉकिंग (यान अंतरिक्ष स्टेशन से अलग होना) 14 जुलाई को शाम 4:30 बजे होगा। मिशन की वापसी का नेतृत्व स्पेसएक्स के ‘ड्रैगन’ कैप्सूल द्वारा किया जाएगा।
अंतरिक्ष में किए गए खास वैज्ञानिक प्रयोग
Axiom-4 मिशन के दौरान, शुभांशु और उनकी टीम ने माइक्रोग्रैविटी में कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए। इनमें प्रमुख हैं
ब्लड सैंपलिंग और बायोमेडिकल रिसर्च
माइक्रोएल्गी का अध्ययन, जिससे भविष्य में अंतरिक्ष में भोजन और ऑक्सीजन सप्लाई संभव हो सकती है।
नैनोमटेरियल्स की रिसर्च, जिससे वियरेबल हेल्थ मॉनिटरिंग डिवाइस बन सकें।
थर्मल कम्फर्ट सूट और मसल स्टिमुलेशन पर टेस्टिंग।
अंतरिक्ष यात्रियों के व्यवहार का रिकॉर्डिंग और विश्लेषण।
इन सभी प्रयोगों का उद्देश्य भविष्य के दीर्घकालिक स्पेस मिशनों को और अधिक सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाना है।
इसलिए नहीं मिल पाएंगे 7 दिन तक घरवाले
अंतरिक्ष से लौटने वाले हर यात्री को 7 दिन के ‘स्पेस रिहैब’ से गुजरना होता है। अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी (सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण) के कारण इंसानी शरीर पर गहरा असर होता है। मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं, संतुलन बिगड़ता है, और हृदय प्रणाली भी प्रभावित होती है। इसी कारण, शुभांशु को NASA के डॉक्टर्स और स्पेशलिस्ट्स की निगरानी में शारीरिक रूप से फिर से फिट बनाया जाएगा।
रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया कैसी होगी?
रिहैब के पहले चरण में
चलने-फिरने की क्षमता बहाल की जाएगी
हृदय की धड़कन और श्वसन प्रणाली की जांच होगी
शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी पर ध्यान दिया जाएगा
बाद के चरणों में
प्रोप्रियोसेप्टिव ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि संतुलन और कोऑर्डिनेशन सुधरे
रोजमर्रा की फिजिकल एक्टिविटीज़ के लिए तैयारी करवाई जाएगी
इस पूरे प्रोसेस के दौरान शुभांशु किसी बाहरी संपर्क में नहीं रहेंगे और NASA की कड़ी निगरानी में रहेंगे।
मिशन छोटा था इसलिए रिहैब भी सीमित
चूंकि Axiom-4 मिशन केवल 18 दिनों का था, इसलिए शुभांशु को 7 दिन की रिकवरी पर्याप्त मानी जा रही है। तुलना करें तो, NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स जब 600 से ज्यादा दिन अंतरिक्ष में बिता कर लौटी थीं, तब उन्हें लगभग 45 दिन तक रिहैब में रखा गया था।
भारत के लिए एक और गौरव
शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा भारत के लिए गर्व का विषय है। वह भारतीय युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और अंतरिक्ष विज्ञान में भारत की हिस्सेदारी को और भी मजबूत कर रहे हैं। उनके मिशन ने वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी क्षमता का भी प्रदर्शन किया है।
