indian airforce pilots sacrifice – churu jet crash july 2025: दोनों पायलटों ने 1200 परिवारों को बचाया, चूरू में विमान हादसा
indian airforce pilots sacrifice – churu jet crash july 2025 09 जुलाई 2025 को राजस्थान के चूरू जिले में एक दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जब भारतीय वायु सेना का जगुआर फाइटर जेट क्रैश हो गया। इस दुर्घटना में दोनों पायलटों की शहादत हो गई, लेकिन उनकी साहसिकता और कर्तव्यनिष्ठा ने 1200 परिवारों को बचा लिया। यह हादसा भानुदा गांव के पास हुआ, जो चूरू के मुख्य इलाके से लगभग 2 किमी दूर था।

शहीद पायलटों की पहचान
इस दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह सिंधु (44) और फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषिराज (23) शहीद हो गए। स्क्वाड्रन लीडर लोकेंद्र सिंह हरियाणा के रोहतक और फ्लाइट लेफ्टिनेंट ऋषिराज राजस्थान के सुमेरपुर के खिंवादी गांव से थे। दोनों पायलटों ने अपनी जान देकर भानुदा और आसपास के गांवों में रहने वाले 1200 परिवारों की जिंदगी बचाई।
हादसा: हवा में लहराते हुए गिरा जेट
हादसे की प्रत्यक्षदर्शी मनोज प्रजापत बताते हैं कि वह हादसे के समय अपने गांव में थे और उन्होंने देखा कि जेट हवा में लहराकर गिर रहा था। विमान के अचानक पेड़ से टकराने के बाद वह 100 मीटर से ज्यादा घिसटते हुए नीचे गिरा, और उसमें आग लग गई। गिरने का धमाका इतना तेज था कि लगा जैसे कोई बम फटा हो।

वहां पहुंचे कई ग्रामीणों ने देखा कि 100 से 200 मीटर के दायरे में दोनों पायलटों के शरीर के टुकड़े पड़े थे, और जेट का मलबा चारों ओर बिखरा हुआ था। यह दृश्य देखकर सभी की आंखों में आंसू थे, लेकिन यही दृश्य पायलटों की साहसिकता की कहानी बयान करता था, जिन्होंने अंतिम समय तक अपने कर्तव्य को निभाया।
1200 परिवारों को जीवनदान
घटनास्थल पर पहुंचे विजय शर्मा और मोहित शर्मा जैसे ग्रामीणों ने बताया कि अगर यह विमान भानुदा या आसपास के गांवों पर गिरता, तो कई और जानें जा सकती थीं। उन्होंने कहा, “दोनों पायलटों ने अपनी जान देकर हमारे गांवों को बचा लिया। उन्होंने विमान को गांव से बाहर गिरने दिया, ताकि किसी की जान न जाए।”
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया और एयरफोर्स की तत्परता
हादसे के बाद करीब 1500 ग्रामीण मौके पर इकट्ठा हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे। कुछ ही समय में आर्मी और एयरफोर्स के जवान भी पहुंचे, और वहां मलबा इकट्ठा करने और साक्ष्य जुटाने में व्यस्त हो गए। रातभर यह कार्य जारी रहा, और गांव में सैन्य वाहनों का आना-जाना लगा रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि हादसे के बाद पूरे गांव को छावनी में बदल दिया गया, और सड़कें बंद कर दी गईं। उस रात सैन्य टेंटों में मलबा तलाशने का काम किया गया और घटनास्थल की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी की गई।
एक और हादसा: मिसाइल का मलबा गिरा था
उल्लेखनीय है कि मई में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी गांव के पास एक मिसाइल का मलबा गिरा था, और उस समय भी आसपास के इलाके में जोरदार धमाका हुआ था। यह घटनाएं दिखाती हैं कि इस इलाके में वायुसेना के एयरक्राफ्टों का लगातार अभ्यास और संचालन होता है।
9 जुलाई को चूरू में हुआ फाइटर जेट क्रैश न केवल वायुसेना के वीर पायलटों की शहादत का प्रतीक बना, बल्कि उनके साहस और कर्तव्यनिष्ठा ने गांव के 1200 परिवारों की जिंदगी बचाई। यह घटना भारत की वायुसेना की बहादुरी और उसके हर एक सदस्य के प्रति हमारी सम्मान और कृतज्ञता की भावना को दर्शाती है।

