सर्दियों में बढ़ी हेल्थ प्रॉब्लम्स
ठंड बढ़ते ही बीमारियों का असर साफ दिखने लगा है। सुबह-शाम की ठिठुरन कम होती धूप और प्रदूषण का मिश्रण लोगों की सेहत पर सीधा प्रभाव डाल रहा है, कई अस्पतालों में ओपीडी में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ी है खासकर बच्चों और बुजुर्गों की।
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सांस और बुखार के केस तेज़ी से बढ़े
पिछले एक हफ्ते में कई सरकारी और निजी अस्पतालों की रिपोर्ट बताती है कि वायरल फीवर खांसी और सांस लेने में दिक्कत के मामलों में तेज़ उछाल आया है। डॉक्टरों के मुताबिक, लगातार गिरता तापमान और हवा में बढ़ते प्रदूषक इसके बड़े कारण हैं। भोपाल के एक निजी अस्पताल में पिछले महीने जहां रोज़ाना 120–150 मरीज आते थे वहीं अब यह संख्या 250 के करीब पहुंच गई है कई शहरों में ऐसी ही स्थिति देखने को मिली है।
बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा असर
ठंड के मौसम में इम्यूनिटी कमजोर पड़ने से बच्चे और बुजुर्ग जल्दी संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं हाल ही में एक स्कूल में आधे से ज्यादा बच्चों के अनुपस्थित होने का कारण वायरल बुखार बताया गया, अभिभावक भी मानते हैं कि सुबह की कक्षाओं में बच्चों को ठंडी हवा से बचाना मुश्किल हो रहा है।
मौसम और प्रदूषण बना दोहरा खतरा
AQI लगातार खराब
कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार खराब श्रेणी में दर्ज हो रहा है डॉक्टर बताते हैं कि खराब हवा में मौजूद कण न सिर्फ फेफड़ों को प्रभावित करते हैं बल्कि पहले से मौजूद एलर्जी, दमा और साइनस जैसी समस्याओं को भी बढ़ा देते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ साफ कहते हैं कि सुबह के समय लंबे समय तक बाहर रहने से बचें और जरूरत हो तो मास्क का उपयोग करें, घर के अंदर वेंटिलेशन बनाए रखना और पर्याप्त पानी पीना बेहद ज़रूरी है।
