अमेरिका करेगा भारत के साथ जल्द डील
India-US Trade Agreement Pros and Cons: इंडिया अमेरिका ट्रेड डील का सभी को बेसब्री से इंतजार कुछ दिनों पहले हुई इंडोनेशिया और अमेरिका की डील में भी इंडोनेशिया पर 19 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया। भारत और अमेरिका में ट्रेड डील में विशेषज्ञों द्वारा कयास लगाए जा रहे ही की भारत पर कम से कम 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जायेगा। भारत की यह डील अगस्त से पहले संभावित है.. हलाकि जब से भारत की ओर से भारतीय व्यावारिक प्रतिनिधी मंडल अमेरिका गया है तब से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार बयान दे चुके हैं अमेरिका भरत के साथ जल्द ही बड़ी डील करने जा रहा है।
कृषि औऱ डेयरी के क्षेत्र में संभावित डील
अमेरिकी राष्ट्रपति जल्द ही डील पूरी होंने के संकेत दिए… यह सही है की भारत एक बड़ा बाजार है अमेरिका यहाँ बड़े अवसर तलासने के प्रयास में है विशेष रूप से कृषि और डेयरी क्षेत्र में अगर इसमें अमेरिका अपने कृषि और डेयरी प्रोडक्ट भारत में भेजता है तो भारत के घरेलू उत्पादकों को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। भारत का कृषि क्षेत्र अभी भी अर्थव्यवस्था का 40 प्रतिशत है और डेयरी क्षेत्र में हम जितना उत्पादन करते है उससे अधिक का हम उपभोग कर जाते है बहुत ही कम मात्र में किसी अन्य देश को हम निर्यात करते है।
मांसाहारी दूध से सावधान
हमें यह समझना होगा की अमेरिका में डेयरी प्रोडक्ट का उत्पादन के लिए गाय और अन्य पशुओ को केवल दूध उत्पादन की मशीन समझते है वे भारत की तरह पशुओ से संवेदनाएं नहीं रखते उत्पादन ज्यादा हो इसके लिए पशु जनित आहार भी देते है जिससे उत्पादन में बढोतरी होती है ऐसे में भारत में ऐसे उत्पाद का पहुचना चिंताजनक है।
भारत में दूध को कई पूजा पाठ, धार्मिक अनुष्ठान , हवन और देवताओ के अभिषेक के लिए भी उपयोग में लिए जाता है। इसलिए ‘मांसाहारी दूध’ धार्मिक भावनाओ को भी आहत करता है. भारत द्वारा इसकी शुद्धता का प्रमाणिकरण बिलकुल जायज है।
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सोयाबीन और मक्का भी होगा आयात
इसके साथ कृषि में सोयाबिन मक्का और कपास की फसलों भारत अमेरिका से आयात कर सकता है… डोनाल्ड ट्रंप जिद्दी प्रकार के नहीं बल्कि एक मंझे हुए सौदेबाज है। दरअसल कृषि हमारी कमजोरी है जबकि ट्रंप को कृषि बाहुल्य 444 काउन्टीज़ में से (अधिकांस मध्य अमेरिकी है) 443 77 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे। ये लोग जेनेटकली मॉडिफाइड कृषि करते है जो भारत में प्रतिबंधित है।
भारत का की नाटो को करारा जबाब
एक तरफ नाटो चीफ के बयान से भारत और चाइना की मुश्किलें पहले से बड़ी है। जिसमे नाटो चीफ मार्क रूट ने स्पष्ट किया था भारत चाइना और अन्य देश अगर रूस से कच्चा तेल आयात करना अभी भी जरी रखेते है तो उन पर 100 प्रतिशत तक का टैरिफ लाद दिया जायेगा। और अन्य प्रतिबंधो का भी सामना करना होगा। ये साफ़ तौर से देखा जा सकता है नाटो चीफ का ये बयान यूरोपियन यूनियन के सभी देश की सहमति द्वारा दिया गया है।
ऐसे समय में नाटो चीफ का बयान आना जब भारत अमेरिका की डील आखरी पड़ाव पर ये बदलते वैश्विक परिद्रश्य को दर्शाता है. भारत के विदेश मंत्रायल के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नाटो चीफ के बयान को जबाब देते हुए स्पष्ट किया की- “भारत के लोगों में ऊर्जा जरूरतों को सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इस प्रयास में बाज़ार में जो उप्लब्ध है और वैश्विक परिस्थितियों द्वारा निर्देशित है. हम विशेष रूप से किसी भी दोहरे मापदंड के खिलाफ चेतावनी देते है.’’
India-US Trade Agreement Pros and Cons: अब देखने वाली बात है की भारत अपने आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए अमेरिका से न्यायसम्मत ट्रेड डील कर पाऐगा या बंगला देश और इंडोनेशिया की तरह अमेरिकी पूंजीवाद की का शिकार बन जायेगा।
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