भारत 70,000 करोड़ में जर्मनी से 6 पनडुब्बियां खरीदेगा
भारत सरकार ने अपनी नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए जर्मनी से 6 एडवांस्ड पनडुब्बियां खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने ‘प्रोजेक्ट 75 इंडिया’ के तहत मझगांव डॉकयार्ड्स लिमिटेड (MDL) के साथ जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स से इस डील के लिए बातचीत की मंजूरी दे दी है। इस डील की कीमत लगभग ₹70,000 करोड़ हो सकती है।
एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन सिस्टम से लैस पनडुब्बियां
इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) सिस्टम होगा, जिससे ये पनडुब्बियां तीन हफ्ते तक पानी के नीचे रह सकती हैं। भारतीय नौसेना वर्तमान में स्कॉर्पीन क्लास की डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का इस्तेमाल करती है, जिन्हें DRDO के फ्यूल सेल बेस्ड AIP से लैस किया जाएगा। इससे पनडुब्बियां लंबे समय तक बिना सतह पर आए ऑपरेशनल रह सकेंगी और दुश्मन के रडार से बचने में सक्षम होंगी।
भारत की भविष्यवाणी: 10 पनडुब्बियां रिप्लेस होंगी
भारतीय नौसेना अगले 10 सालों में अपनी 10 पनडुब्बियों को रिप्लेस करने की योजना बना रही है। इस लक्ष्य के मद्देनजर, भारत सरकार परमाणु और पारंपरिक पनडुब्बियों के लिए कई परियोजनाओं को मंजूरी दे चुकी है। यह स्वदेशी पनडुब्बी निर्माण क्षमता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इजराइल से रैम्पेज मिसाइलों की खरीद
भारत सरकार इजराइल से रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइलों की बड़ी खेप भी खरीदने वाली है। यह मिसाइल पाकिस्तान के मुरीदके और बहावलपुर स्थित आतंकवादी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत सफलतापूर्वक इस्तेमाल की गई थी। भारत की वायुसेना इन मिसाइलों को अपने सभी बेड़ों पर लगाने की योजना बना रही है।
रैम्पेज मिसाइल की खासियत
- रेंज: 150 से 250 किमी
- स्पीड: मैक 2-3, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना मुश्किल है
- वजन: 570 किलो और लंबाई 4.7 मीटर
- लॉन्चिंग प्लेटफॉर्म: F-15, F-16, F-35 और सुखोई-30MKI
यह मिसाइल उच्च-मूल्य वाले लक्ष्य जैसे कमांड सेंटर, एयरबेस, हथियार डिपो, और रडार स्टेशनों पर सटीक हमले कर सकती है।
भारत की रक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा
भारत की रक्षा रणनीति में यह दोनों डील्स एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जिससे भारतीय वायुसेना और नौसेना की ताकत में इजाफा होगा। जर्मनी से पनडुब्बियां और इजराइल से रैम्पेज मिसाइलों की खरीद के साथ, भारत अपनी सैन्य क्षमताओं को और भी बढ़ा सकता है, खासकर उच्च-स्तरीय रक्षा प्रणालियों के निर्माण में।
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