भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाने वाली एक बड़ी रक्षा डील पर इसी सप्ताह मुहर लग सकती है। रक्षा मंत्रालय फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे सकता है। खास बात यह है कि यह फैसला फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा से ठीक पहले आने की संभावना जताई जा रही है।
रक्षा मंत्रालय की मेज पर 3.25 लाख करोड़ की डील
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित सौदे की कुल लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपए आंकी गई है। रक्षा मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद इस डील को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा. यह सौदा भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या की कमी को देखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है।
कैसे होगी खरीद, कितने बनेंगे भारत में
प्रस्ताव के तहत भारत फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से 18 राफेल विमान सीधे खरीदेगा। शेष 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। इनमें कुछ दो सीट वाले विमान भी होंगे, जिनका इस्तेमाल पायलटों की ट्रेनिंग के लिए किया जाएगा।
यही वजह है कि इस डील को सिर्फ खरीद नहीं, बल्कि दीर्घकालिक क्षमता निर्माण के तौर पर देखा जा रहा है।
मेक इन इंडिया को मिलेगा बड़ा बूस्ट
इस सौदे में भारत को आधुनिक तकनीक हस्तांतरित करने का प्रावधान भी शामिल है। डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के बीच पहले से हुए समझौतों के तहत हैदराबाद में एक अत्याधुनिक फैक्ट्री स्थापित की जा रही है. यहां राफेल विमान के अहम हिस्से बनाए जाएंगे, जिनमें पिछला सेक्शन, बीच का ढांचा और आगे का हिस्सा शामिल होगा। इन पुर्जों का उत्पादन 2028 से शुरू होने की उम्मीद है।
राफेल की मारक क्षमता क्यों है खास
राफेल की ताकत सिर्फ उसकी रफ्तार तक सीमित नहीं है। भारतीय वायुसेना पहले ही इन विमानों से स्कैल्प (SCALP) मिसाइल लॉन्च कर चुकी है, जो 250 किलोमीटर से ज्यादा दूरी पर बेहद सटीक हमला करने में सक्षम है. इसके अलावा राफेल में मेटियोर हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल, हैमर हथियार, स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और आधुनिक रडार लगे हैं। यही कारण है कि इसे दुनिया के सबसे सक्षम मल्टी-रोल फाइटर जेट्स में गिना जाता है।
वायुसेना और नौसेना दोनों के बेड़े में
फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास दो स्क्वाड्रनों में 36 राफेल विमान शामिल हैं। सी वेरिएंट की आखिरी डिलीवरी दिसंबर 2024 में हुई थी. वहीं भारतीय नौसेना ने भी एम वेरिएंट के 26 राफेल विमानों का ऑर्डर दिया है, जिसकी कीमत करीब 63,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। ये विमान आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य जैसे विमानवाहक पोतों से ऑपरेट करेंगे।
रखरखाव से लेकर ट्रेनिंग तक सब शामिल
नई डील में विमानों की मरम्मत, रखरखाव, जरूरी स्पेयर पार्ट्स और तकनीकी कर्मचारियों की ट्रेनिंग की व्यवस्था भी शामिल है। यानी सिर्फ विमान नहीं, पूरा इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा. गौरतलब है कि भारत ने पिछले साल मई में पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल विमानों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
