india taliban – jaishankar claim denied – तालिबान ने भारत पर रॉकेट अटैक के दावों को बताया झूठा
india taliban – jaishankar claim denied : भारत और अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बीच पहली बार मंत्री स्तरीय बातचीत हुई है। गुरुवार रात विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री मौलवी आमिर खान मुत्ताकी से फोन पर बातचीत की। इस कॉल ने भारत-अफगान रिश्तों में एक नई दिशा और संभावनाओं को जन्म दिया है।
🤝 तालिबान से पहली बार सीधे संवाद
जयशंकर और मुत्ताकी के बीच यह पहली बार है जब भारत और तालिबान सरकार के बीच सीधे संवाद की पुष्टि हुई है। बातचीत के दौरान:
- भारत के पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करने के लिए मुत्ताकी को धन्यवाद दिया गया
- पाकिस्तान के भारत पर मिसाइल हमले के झूठे दावे को खारिज करने के लिए आभार जताया गया
- अफगानिस्तान में कैद अफगान नागरिकों की रिहाई की मांग उठाई गई
🛑 पाकिस्तान के झूठे दावों को अफगानिस्तान ने किया खारिज
पाकिस्तान ने हाल ही में दावा किया था कि भारत ने अफगानिस्तान की सीमा में रॉकेट अटैक किया है। हालांकि, अफगान सरकार ने इस दावे को तुरंत झूठा और निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। जयशंकर ने अफगानिस्तान के इस स्टैंड के लिए धन्यवाद दिया और इसे भारत-अफगान सहयोग की सकारात्मक दिशा बताया।

भारत और अफगानिस्तान: ऐतिहासिक संबंधों की नई परिभाषा
बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के लोगों के बीच मित्रवत संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों पक्षों ने इस पर चर्चा की कि इन रिश्तों को आधुनिक भू-राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में कैसे और मजबूत किया जा सकता है।
🗝️ अफगान कैदियों की रिहाई का मुद्दा उठा
जयशंकर ने अफगान विदेश मंत्री से भारत में बंद अफगान नागरिकों की रिहाई और उनके वतन वापसी की अपील भी की। यह कदम मानवीय दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है और इससे दोनों देशों के बीच मानवाधिकार आधारित सहयोग का संकेत मिलता है।
📅 कैसे शुरू हुई बातचीत की प्रक्रिया?
तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने 25 अगस्त 2021 को तत्काल प्रभाव से वीजा जारी करना बंद कर दिया था। हालांकि, जनवरी 2025 में दुबई में भारत और तालिबान सरकार के बीच पहली मुलाकात हुई थी।
| तिथि | बातचीत | स्थान |
|---|---|---|
| जनवरी 2025 | विक्रम मिश्री और मुत्ताकी | दुबई |
| 28 अप्रैल 2025 | आनंद प्रकाश और मुत्ताकी | दुबई |
| मई 2025 | एस जयशंकर और मुत्ताकी | फोन कॉल |
➡️ यह बातचीत अब धीरे-धीरे राजनयिक संबंधों की ओर बढ़ने के संकेत दे रही है।
🔍 भारत ने तालिबान को अब तक मान्यता नहीं दी, लेकिन मदद की भरमार
भारत ने अब तक तालिबान की सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है, लेकिन पिछले 20 वर्षों में अफगानिस्तान को 25,000 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है।
भारत ने:
- इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा
- सड़क और बिजली परियोजनाएं में अहम योगदान दिया है।
पिछले वर्ष तालिबान ने मुंबई स्थित अफगान वाणिज्य दूतावास में अपना राजनयिक नियुक्त किया था, जो भारत के लिए एक स्पष्ट संकेत है कि वह भारत से मजबूत संबंध चाहता है।
🌍 अन्य देश पहले ही तालिबान से जुड़ चुके हैं
रूस, चीन, तुर्की, ईरान और उज्बेकिस्तान जैसे देशों ने पहले ही अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के साथ राजनयिक संबंधों की शुरुआत कर दी है। भारत धीरे-धीरे, लेकिन रणनीतिक ढंग से तालिबान से संवाद बढ़ा रहा है।
🧠 क्या भारत तालिबान को मान्यता देगा? विशेषज्ञों की राय
हालांकि भारत की ओर से अब तक तालिबान सरकार को आधिकारिक मान्यता नहीं दी गई है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- आर्थिक और रणनीतिक हितों के कारण भारत तालिबान से जुड़ने को मजबूर हो सकता है
- भारत की सेंट्रल एशिया में रणनीतिक पहुंच के लिए अफगानिस्तान अहम है
- चीन-पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करने के लिए भारत को अफगानिस्तान में मौजूद रहना जरूरी है
📢 रिश्तों की नई शुरुआत, पर हर कदम सोच-समझकर
एस. जयशंकर और मुत्ताकी के बीच हुई ये बातचीत भारत-अफगान रिश्तों में एक अहम मोड़ है। भले ही यह बातचीत मान्यता की पुष्टि नहीं करती, लेकिन यह जरूर दिखाती है कि भारत कूटनीतिक स्तर पर संतुलन बना रहा है।
🔹 तालिबान के साथ खुला संवाद
🔹 पाकिस्तान के झूठे प्रचार का खंडन
🔹 मानवीय सहायता और सहयोग के नए रास्ते
दिवाली से पहले जहां देश आर्थिक राहत की ओर देख रहा है, वहीं विदेश नीति में यह एक शांत लेकिन मजबूत कूटनीतिक चाल मानी जा रही है।
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