पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर ड्रोन हमला किया था।
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यह मान लेना आसान नहीं है….
पहले तक इस बात से इन्कार किया जाता रहा। कई बार पाकिस्तान ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ। लेकिन अब जो कहा गया, वह सीधे बयान जैसा नहीं लगता। यह महसूस होता है जैसे इसे धीरे-धीरे स्वीकार किया जा रहा हो।
इशाक डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि…
36 घंटे में करीब 80 ड्रोन पाकिस्तान की ओर भेजे गए थे। पाकिस्तानी सेना ने एक-एक कर 79 ड्रोन फेला दिए। लेकिन एक ड्रोन एयरबेस तक पहुंचने में सफल रहा। उन्होंने यह भी कहा कि हमला अपेक्षा से ज़्यादा बड़ा और गंभीर था।
सेना के लिए यह एक महत्वपूर्ण स्थल
नूरखान एयरबेस पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था में एक अहम कड़ी है। यह रावलपिंडी के चकाला इलाके में स्थित है। सेना के लिए यह एक महत्वपूर्ण स्थल रहा है। जब किसी देश का रक्षा आधार निशाने पर आता है, तो उसके प्रभाव दूरगामी होते हैं। यही वजह है कि देश के लोगों के दिलों में यह खबर तेजी से फैल रही है।
इशाक डार ने स्पष्ट किया कि….
नूरखान अकेला स्थान नहीं था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने कुल 11 एयरबेस और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। यह संख्या अपने आप में बहुत कुछ कहती है। अगर एक ही जगह की बात होती, तो शायद इसे अलग तरह से लिया जाता। लेकिन 11 स्थानों पर हमले की बात बताती है कि कार्रवाई संगठित और सोच-समझकर की गई थी।
26 पर्यटक मारे गए
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में एक बुरा आतंकी हमला हुआ था। 26 पर्यटक वहां मारे गए थे। उस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। भारत ने कहा कि यह हमला देश के प्रति एक गंभीर चुनौती थी। वहीँ से प्रतिक्रिया शुरू हुई।
भारत की सरकार ने पहले भी कहा था कि प्रतिक्रिया में कदम उठाया गया। उसने कहा कि यह हमला सीमा पार से हो रहे आतंकवादी प्रयासों का जवाब था। विशेषकर उन ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनसे आतंक फैलाया जाता था। भारत का कहना रहा है कि कोई भी हमला या आतंक का समर्थन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह पहली बार नहीं है…
जब पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता ने ऐसी बात कही है। पहले भी कुछ बयान दिए गए थे, लेकिन स्पष्ट स्वीकारोक्ति आज पहली बार सामने आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक बयानबाज़ी और वास्तविकता के बीच की दूरी कितनी कठिन होती है।
यह बयान कई सवाल भी खड़े करता है।
- क्या आगे और खुलासे होंगे?
- क्या दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ेगा?
- क्या यह बयान किसी दरार का संकेत है?
- फिलहाल यह साफ़ है कि यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि एक बदलाव की दस्तावेज़ है।
हमारा नजरिया यह रहा कि दोनों पक्षों के बयान समय-समय पर बदलते रहे हैं। पर आज जो कहा गया है, उस पर ध्यान देना जरूरी है। यह खबर न केवल सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी दोनों देशों में गहरी छाप छोड़ सकती है।
