india missile strikes – sensex nifty volatility analysis : सेंसेक्स और निफ्टी में भारी उतार-चढ़ाव
india missile strikes – sensex nifty volatility analysis : भारत के पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। जानिए इस घटनाक्रम का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा है और निवेशकों को क्या करना चाहिए।
जानिए सेंसेक्स और निफ्टी पर इसका असर
भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए, और इस कार्रवाई ने भारतीय शेयर बाजार को भी हिला दिया। इस समाचार के बाद, सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन गया है। इस आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि इस सैन्य कार्रवाई का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा, और आगे निवेशकों को क्या कदम उठाने चाहिए।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और मिसाइल हमले
पुलवामा हमले के दो सप्ताह बाद, भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकवादी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए। इस सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नाम से जाना गया, और इसमें बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का गढ़ और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य ठिकाना शामिल था। इस हमले में 26 नागरिकों की जान चली गई, और इससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया।
यह सैन्य कार्रवाई भारत की नीतियों का हिस्सा रही है, जिसमें सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इस हमले के बाद शेयर बाजार पर क्या प्रभाव पड़ा, यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल था।
सेंसेक्स और निफ्टी की स्थिति
भारत द्वारा पाकिस्तान और पीओके में सैन्य हमले करने के बाद, भारतीय शेयर बाजार में अस्थिरता देखी गई। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स ने 80,844.63 अंक के उच्चतम स्तर को छुआ, जबकि निफ्टी ने 24,449.60 अंक तक पहुंचने में सफलता हासिल की। लेकिन जैसे-जैसे दिन बढ़ा, बाजार में गिरावट भी देखने को मिली। सेंसेक्स 79,937.48 अंक तक नीचे आया, जबकि निफ्टी 24,220 तक गिर गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए एक संकेत है कि बाजार वैश्विक घटनाओं और देश की सुरक्षा स्थिति से प्रभावित हो सकता है। हालांकि, कुछ निवेशकों का मानना है कि इस स्थिति का स्थायी प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि बाजार ने पहले ही इस तरह की घटनाओं को हजम कर लिया है।
विदेशी निवेशकों की भूमिका
सेंसेक्स और निफ्टी में उतार-चढ़ाव के बावजूद, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की उपस्थिति ने भारतीय बाजार को लचीला बनाए रखा। पिछले 14 कारोबारी दिनों में एफआईआई ने 43,940 करोड़ रुपये की निवेश राशि भारतीय शेयर बाजार में डाली है।
एफआईआई का ध्यान अभी वैश्विक मैक्रो घटनाओं पर है, जैसे कि अमेरिकी डॉलर की कमजोरी, 2025 में अमेरिकी और चीन की धीमी वृद्धि दर, और भारत की संभावित बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता। यह सब बाजार को सहारा देने में मदद करता है, और भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत हो सकता है।
प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर असर
सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में, एचसीएल टेक, एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, सन फार्मा, अल्ट्राटेक सीमेंट और नेस्ले के शेयरों में गिरावट आई। वहीं, टाटा मोटर्स, भारतीय स्टेट बैंक, एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक, बजाज फाइनेंस और पावर ग्रिड जैसी कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया।
यह दिखाता है कि कुछ सेक्टरों में स्थिरता बनी रही, जबकि अन्य क्षेत्रों में अस्थिरता के कारण गिरावट आई। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहकर अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने की आवश्यकता हो सकती है।
एशिया और अमेरिका के बाजारों पर प्रभाव
भारत के सैन्य हमले के बाद एशियाई बाजारों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली। दक्षिण कोरिया का कोस्पी, शंघाई का एसएसई कंपोजिट इंडेक्स और हांगकांग का हैंगसेंग सकारात्मक रूप में कारोबार कर रहे थे। वहीं, जापान के निक्केई 225 ने गिरावट के साथ कारोबार किया।
अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट आई, जो भारतीय बाजार पर असर डाल सकती थी। इस समय भारतीय बाजार को वैश्विक व्यापार और राजनीतिक घटनाओं से भी ध्यान रखना होगा, ताकि निवेशकों को सही निर्णय लेने में मदद मिल सके।
भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता
भारत और ब्रिटेन ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए, जो भारतीय निर्यात पर 99 प्रतिशत शुल्क कम करेगा। इससे भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
यह समझौता विशेष रूप से भारतीय कंपनियों के लिए फायदेमंद हो सकता है, जो अब ब्रिटिश बाजार में अपनी उपस्थिति बढ़ा सकती हैं। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को एक और बढ़ावा मिलेगा, और शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बन सकता है।
निवेशकों के लिए क्या कदम उठाना चाहिए?
शेयर बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव के समय निवेशकों को धैर्य रखने की सलाह दी जाती है। हालांकि, वैश्विक घटनाओं और देश की सुरक्षा स्थिति का असर बाजार पर पड़ सकता है, लेकिन एफआईआई की निरंतर खरीदारी और भारत के आर्थिक विकास के सकारात्मक संकेतों के कारण, बाजार में दीर्घकालिक निवेश के अवसर मौजूद हो सकते हैं।
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि अस्थिरता के समय में सही रणनीति अपनाना महत्वपूर्ण होता है। यदि आप लंबे समय के लिए निवेश करने का सोच रहे हैं, तो यह समय अच्छी कंपनियों के शेयरों में निवेश करने का हो सकता है, जो भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
भारत के पाकिस्तान और पीओके में मिसाइल हमले के बाद भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। हालांकि, बाजार में कुछ गिरावट आई, लेकिन एफआईआई का निवेश और भारत के आर्थिक विकास के संकेत इसे लचीला बनाए रखते हैं। निवेशकों को सतर्क रहते हुए, वैश्विक घटनाओं और स्थानीय घटनाक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त कर निवेश निर्णय लेना चाहिए।
अस्थिरता आपके लिए एक अवसर
समय के साथ, जैसे-जैसे स्थिति स्पष्ट होगी, बाजार में और भी स्थिरता आ सकती है। यदि आप सही समय पर निवेश करते हैं, तो यह अस्थिरता आपके लिए एक अवसर बन सकती है।
भारत द्वारा पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में अस्थिरता देखने को मिली। जानें कैसे इस सैन्य कार्रवाई ने भारतीय शेयर बाजार को प्रभावित किया और निवेशकों को किस तरह की रणनीति अपनानी चाहिए।
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