
lpg cylinder price hike : मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा बाजार में हलचल के बीच देश में रसोई गैस के दाम बढ़ गए हैं। आम घरों की रसोई पर सीधा असर पड़ा है। सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation ने घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी है, जबकि कमर्शियल सिलेंडर 115 रुपये महंगा कर दिया गया है.
lpg cylinder price hike: आज से नई दरे लागू
नई दरें 7 मार्च से लागू हो चुकी हैं और कंपनी की वेबसाइट पर भी अपडेट कर दी गई हैं. दिल्ली में 14.2 किलो वाला घरेलू LPG सिलेंडर अब 913 रुपये का हो गया है, जो पहले 853 रुपये में मिलता था। यानी सीधे 60 रुपये की बढ़ोतरी।
lpg cylinder price hike: बढ़े शहरों में नए दाम
| शहर | नए दाम (₹) | पुराने दाम (₹) | अंतर (₹) |
| दिल्ली | 913.00 | 853.00 | ▲60.00 |
| कोलकाता | 939.00 | 879.00 | ▲60.00 |
| मुंबई | 912.50 | 852.50 | ▲60.00 |
| चेन्नई | 928.50 | 868.50 | ▲60.00 |
| भोपाल | 918.50 | 858.50 | ▲60.00 |
| जयपुर | 916.50 | 856.50 | ▲60.00 |
| पटना | 1011.00 | 951.00 | ▲60.00 |
| रायपुर | 984.00 | 824.00 | ▲60.0 |
दाम बढ़ने के दो बड़े कारण
1. होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सबसे बड़ा असर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर दिख रहा है। करीब 167 किलोमीटर लंबा यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है.दुनिया के कुल पेट्रोलियम का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने तेल निर्यात के लिए इसी रूट पर निर्भर हैं। भारत की बात करें तो देश अपनी जरूरत का करीब, 50% कच्चा तेल, 54% LNG इसी रास्ते से मंगाता है। ऐसे में अगर यह मार्ग प्रभावित होता है तो सप्लाई पर दबाव बढ़ सकता है।
2. कतर में LNG उत्पादन प्रभावित
पिछले हफ्ते अमेरिका और इजराइल की स्ट्राइक के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू की। इसी दौरान कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमलों की खबरें सामने आईं, जिसके बाद वहां कुछ समय के लिए उत्पादन रोक दिया गया.भारत के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि देश अपनी लगभग 40% LNG यानी करीब 2.7 करोड़ टन सालाना गैस कतर से आयात करता है।
जाने कैसे तय होती है गैस सिलेंडर की कीमत
LPG सिलेंडर की कीमत तेल कंपनियां हर महीने तय करती हैं। इसमें पिछले महीने के अंतरराष्ट्रीय LPG दाम, डॉलर-रुपया एक्सचेंज रेट और ट्रांसपोर्ट जैसे खर्च शामिल होते हैं.इसके बाद टैक्स, ट्रांसपोर्ट और डीलर कमीशन जोड़कर अंतिम खुदरा कीमत तय की जाती है। सब्सिडी वाले सिलेंडर में सरकार कुछ हिस्सा देती है, जबकि गैर-सब्सिडी वाले सिलेंडर की पूरी कीमत उपभोक्ता को ही चुकानी पड़ती है।
