india gini index 2025 poverty decline equality: भारत, एक नया आर्थिक बदलाव
india gini index 2025 poverty decline equality: हालिया वर्ल्ड बैंक की Poverty and Equity Brief (Spring 2025) रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत ने 2011‑12 से 2022‑23 तक 17.1 करोड़ लोगों को अत्यंत गरीबी से निकालकर गरीबी दर को 16.2% से घटाकर 2.3% कर दिया है। गिनी इंडेक्स अब 25.5 पर आ चुका है, जिससे भारत दुनिया में चौथे सबसे बराबरी वाले देश बन गया है—जिसमें केवल स्लोवाक, स्लोवेनिया व बेलारूस आगे हैं ।
गिनी इंडेक्स क्या बताता है?
- गिनी स्कोर 0 से 100 तक मापा जाता है—0 → पूर्ण बराबरी, 100 → अतिविभाजन।
- भारत का स्कोर अब 25.5, जो “मध्यम रूप से कम” असमानता दर्शाता है, जबकि 2011 में यह 28.8 था ।
आम जनता को कैसे फायदा मिला?
- अब अधिक परिवारों को भोजन, परिवार स्वास्थ्य, बैंकिंग और रोज़गार जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हो रही हैं।
- ग्रामीण‑शहरी अंतर घटा—ग्रामीण नायाब गरीबी अब 2.8%, शहरी मात्र 1.1% (पहले 18.4% व 10.7%) ।
- निचले‑मध्यम आय वर्ग में भी सुधार—$3.65/दिन की गरीबी दर 61.8% से घटकर 28.1%; 378 मिलियन ऊपर उठे।
चुनौतियां अभी बाकी हैं
- हालांकि उपभोग‑आधारित समानता बेहतर हुई, पर आय समानता में अंतर अभी भी सतह से नीचे है—शीर्ष 10% आय अर्जक के आय अनुपात अन्य से 13 गुना तक ।
- युवा बेरोजगारी अभी भी बड़ी समस्या—करीब 13%, स्नातकों में यह 29% ।
- लिंग अंतर व्याप्त—महिलाओं की श्रमशक्ति में हिस्सेदारी 31%, पुरुषों से 2.34 करोड़ कम।
- कुछ इलाकों और राज्य स्तर पर असमानता बनी हुई है—UP, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल व मध्य प्रदेश में गरीबी अभी भी बहुत है ।
आगे की राह – टिकाऊ व समावेशी विकास
- स्किल डेवलपमेंट – युवा बेरोजगारी कम करने के लिए कौशल सुधार पर ध्यान।
- Formal Sector बढ़ावा – रोजगार में स्थिरता एवं वेतन की गुणवत्ता।
- राज्य-विशिष्ट मिशन्स – ज्यादा प्रभावित राज्यों में विशेष योजना।
- महिला सहभागिता बढ़ाना – सुरक्षित कार्यस्थल और विकल्पों के जरिए।
- सुरक्षा जाल मजबूत करना – DBT, स्वास्थ्य और ग्रामीण कल्याण की पहुंच बढ़ाना।

भारत की यह उपलब्धि—2.3% अत्यंत गरीबी, 25.5 की गिनी, लाखों गरीबों का जीवन स्तर सुधार—एक ऐतिहासिक मोड़ है। यह साबित करता है कि आर्थिक विकास और सामाजिक समानता साथ-साथ चल सकते हैं। लेकिन यह अभी एक प्रारंभ है—आय‑समानता, युवा रोजगार, और लिंग न्याय की दिशा में अभी भी बहुत काम बाकी है। भारत अब इस समानता मॉडल से सीख लेकर आगे बढ़ रहा है—जो न सिर्फ भारत के लिए, बल्कि दुनिया के लिए प्रेरणादायी सबक है।
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