RTRS ट्रैक पर डायनेमिक टेस्टिंग, पायलट की सुरक्षा में बड़ी कामयाबी
चंडीगढ़ में मंगलवार को भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन (DRDO) ने फाइटर जेट हादसों के दौरान पायलट की जान बचाने वाले स्वदेशी एस्केप सिस्टम का महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह टेस्ट ऐसे वक्त में हुआ है जब भारत लड़ाकू विमानों की सुरक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में लगातार प्रगति कर रहा है।

800 किमी/घंटा की रफ्तार पर हुआ हाई-स्पीड टेस्ट
एस्केप सिस्टम का परीक्षण रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) नाम की विशेष ट्रैक पर किया गया, जहां सिस्टम को लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटे की गति तक ले जाया गया इस डायनेमिक टेस्ट में तीन अहम बातों की जांच की गई क्या फाइटर जेट की कैनोपी सही तरीके से टूटकर अलग हुई? क्या इजेक्शन सीट निर्धारित क्रम में बाहर निकली? क्या पायलट को वास्तविक स्थिति में सुरक्षित निकाला जा सकता है? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, ADA, HAL और भारतीय वायुसेना को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण भारत की रक्षा तकनीक को नई मजबूती देता है और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम है।
डायनेमिक टेस्टिंग क्यों होती है खास?
स्टैटिक टेस्ट में मशीनें स्थिर रहती हैं, इसलिए परिणाम अनुमानित रहते हैं। लेकिन डायनेमिक टेस्टिंग में स्थितियाँ वास्तविक उड़ान जैसी होती हैं ऊंची रफ्तार, तेजी से बदलते दबाव और लगातार कंपन। इसी वजह से यह परीक्षण साबित करता है कि इजेक्शन सीट और संबंधित तकनीक असली मिशन के दौरान कितनी विश्वसनीय है।
तेजस विमान के ‘फोरबॉडी’ का इस्तेमाल
टेस्ट के लिए तेजस फाइटर जेट के आगे वाले हिस्से (फोरबॉडी) को RTRS ट्रैक पर स्थापित किया गया। रॉकेट मोटरों से इसे तेज गति दी गई अंदर विशेष हाई-फिडेलिटी डमी पायलट बैठाया गया कैमरों और सेंसर ने हर स्टेप को रिकॉर्ड किया विशेषज्ञों ने जांचा कि सीट का सक्रिय होना और पूरा एस्केप प्रोसेस तय मानक पर काम कर रहा है इस पूरी प्रक्रिया को IAF, इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन और अन्य तकनीकी संस्थानों की टीमों ने मॉनिटर किया।
