
trump on chabahar port: भारत को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मिली है, क्योंकि अमेरिका ने ईरान के चाबहार बंदरगाह पर भारत को लगाए गए प्रतिबंधों से छूट देने का ऐलान किया है। अमेरिकी सरकार ने भारत को छह महीने के लिए इस प्रतिबंध से रियायत दी है, जो भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार और कनेक्टिविटी बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
चाबहार पोर्ट: भारत के लिए महत्वपूर्ण
चाबहार पोर्ट, जो ईरान के दक्षिणी भाग में स्थित है, भारत के लिए अफगानिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। यह बंदरगाह भारत को अफगानिस्तान से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है, विशेष रूप से उस समय जब पाकिस्तान के माध्यम से व्यापार मार्गों पर प्रतिबंध या बाधाएं हो सकती हैं।
इस बंदरगाह की भूमिका को समझते हुए, भारत ने इस परियोजना में निवेश किया था ताकि अफगानिस्तान के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत किया जा सके। चाबहार पोर्ट के जरिए भारत अफगानिस्तान को खाद्य आपूर्ति, कच्चा माल और अन्य व्यापारिक सामान भेजता है। इसके अलावा, यह पोर्ट भारत के लिए मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंच बनाने का भी एक अहम रास्ता है।
अमेरिकी प्रतिबंध और छूट: trump on chabahar port
अमेरिका ने 2018 में ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को फिर से लागू किया था, जिसके बाद अन्य देशों के लिए ईरान के साथ व्यापार करने पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे। हालांकि, भारत ने चाबहार पोर्ट से जुड़ी परियोजनाओं को निरंतर जारी रखने के लिए अमेरिका से छूट की मांग की थी।
गुरुवार को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी कि अमेरिकी सरकार ने भारत को चाबहार पोर्ट से जुड़े प्रतिबंधों से छह महीने की छूट प्रदान की है। यह कदम भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करेगा और भारत को अफगानिस्तान के साथ व्यापारिक कनेक्टिविटी में सहारा देगा।
ट्रम्प प्रशासन की भूमिका
यह छूट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन के तहत दी गई है, जिन्होंने वैश्विक स्तर पर अपने विदेश नीति के तहत ईरान के साथ कई प्रतिबंधों की सख्त नीति अपनाई थी। हालांकि, भारत और अफगानिस्तान के साथ अपने रिश्तों को ध्यान में रखते हुए, अमेरिका ने चाबहार पोर्ट पर भारत को कुछ समय के लिए रियायत देने का निर्णय लिया।
अमेरिका का यह कदम भारतीय कूटनीतिक प्रयासों की सफलता को दर्शाता है, क्योंकि इसने भारत को चाबहार पोर्ट के जरिए अफगानिस्तान के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को बनाए रखने की अनुमति दी है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापार में वृद्धि हो सकती है।
भविष्य की संभावनाएं
भारत के लिए यह छूट एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है, क्योंकि इससे भारत को अफगानिस्तान और अन्य देशों से व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग बढ़ाने का मौका मिलेगा। हालांकि, यह छूट छह महीने के लिए है, और इसके बाद भारत को ईरान के साथ व्यापार के लिए अमेरिका से फिर से छूट लेने की आवश्यकता हो सकती है।
