India Education: एक तरफ सरकार के बड़े-बड़े दावे और दूसरी तरफ ये तस्वीर.. देखिए और बताइए की क्या ये है देश का विकास.. एसे “पड़ेगा इंडिया तो कैसे बढ़ेगा इंडिया”.. क्या सरकार के दावे सिर्फ कागजों में रह गए है.. जिनकी जमीनी हकिकत कुछ नहीं…

जानिए पूरी खबर
मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों को आइना दिखा रही है. जहां सरकार हर बच्चे को स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा देने की बात करती है, वहीं यहां बच्चों की दुनिया अब भी पेड़ की छांव तक सीमित है. हम बात कर रहे हैं आगर मालवा जिले के ग्राम बंजारा डेरा की, जहां दो सालों से सरकारी स्कूल पेड़ के नीचे लग रहा है.
India Education: बच्चो के भविष्य से खिलवाड़
दरहसल पेड़ के नीचे बैठे बच्चे और उन्हें पढ़ा रहे शिक्षक, यह नजारा है शासकीय प्राथमिक विद्यालय बंजारा डेरा का. यह कोई अस्थायी इंतजाम नहीं बल्कि मजबूरी है… क्योंकि जिस भवन में इन मासूमों की पढ़ाई होती थी, वो अब जर्जर हालत में है, दीवारें टूट चुकी हैं, छत कभी भी गिर सकती है और इसी डर से पिछले दो साल से यह स्कूल पेड़ के नीचे चल रहा है.
इस स्कूल में 41 बच्चे…
कक्षा पांचवीं तक संचालित इस प्राथमिक स्कूल में 41 बच्चे नामांकित हैं. स्कूल में दो शिक्षक हैं, जो हर दिन इसी चबूतरे पर ब्लैकबोर्ड टिकाकर बच्चों को पढ़ाते हैं. बारिश में जरूर मजबूरी में छुट्टी हो जाती है लेकिन गर्मी में झुलसती धूप हो…लेकिन यह स्कूल कभी बंद नहीं होता…
India Education: कितनी बार शिकायत की ?
ग्रामीण बताते है की उन्होंने कई बार सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई. ब्लॉक शिक्षा अधिकारी से लेकर जिला प्रशासन तक गुहार लगाई लेकिन हर बार जवाब मिला, कार्रवाई जल्द होगी और फिर वही खामोशी, वही अनदेखी.
शिक्षा के नाम पर करोड़ों का घोटाला
शिक्षा के नाम पर करोड़ों का घोटाला देखने को मिल रहा है.. कही बच्चे टूटे भवन में पड़ रहे है को कही बच्चो के सर पर छत ही नहीं है… यह वही प्रदेश है जहां ‘स्कूल चले हम’ जैसे अभियान चलाए जाते हैं. जहां हर गांव में शिक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं लेकिन बंजारा डेरा जैसे गांवों में अब भी स्कूल की नींव नहीं, सिर्फ छांव बची है. सवाल सिर्फ एक है कि क्या ये बच्चे महज सरकारी आंकड़ों में पढ़ रहे हैं या फिर सचमुच किसी दिन इनके सिर पर भी मजबूत छत होगी..
