
India Condemns Pakistan Army’s: सड़कों पर बहा निर्दोषों का खून, भारत का पाकिस्तान पर बड़ा आरोप
जिस जमीन पर इंसान सवाल पूछे, और जवाब में गोली मिले—वह लोकतंत्र नहीं, जेल होती है। शुक्रवार को भारत ने पाकिस्तान पर जो आरोप लगाए, वो सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं थे—वो एक गहराती हुई त्रासदी की तस्वीर थे, जिसे अब दुनिया नजरअंदाज नहीं कर सकती।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा,
पाकिस्तानी सेना PoK में बर्बरता कर रही है। यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे और दमनकारी रवैये का नतीजा है।
India Condemns Pakistan Army’s: PoK में क्यों भड़का जनसैलाब?
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पिछले पांच दिनों से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। कारण?
- बुनियादी जरूरतों पर सब्सिडी में कटौती
- भयावह महंगाई
- और सबसे बड़ी बात – आम लोगों की आवाज़ को कुचलने वाली सरकारी नीतियां
29 सितंबर से शुरू हुआ ये आंदोलन अब तक 12 निर्दोष लोगों की जान ले चुका है। जो लोग आटा, बिजली और इंसाफ मांगने सड़कों पर उतरे थे, उन्हें गोलियों, लाठियों और धमकियों से जवाब मिला।
India Condemns Pakistan Army’s : सेना के बूटों से रौंदी गई आवाजें
प्रदर्शनकारियों ने जब मुजफ्फराबाद की ओर मार्च किया, तो सेना तैनात कर दी गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है बुज़ुर्गों को पीटा जा रहा है, युवाओं को जमीन पर घसीटा जा रहा है, और महिलाओं को धमकाया जा रहा है।

भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी:
PoK पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है। वहां हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
India Condemns Pakistan Army’s: बांग्लादेश से लेकर अफगानिस्तान तक भारत का स्पष्ट रुख
सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं, भारत ने बांग्लादेश को भी आईना दिखाया। जहां हाल ही में खगराछारी हिंसा पर भारत को दोषी ठहराया गया था, वहां रणधीर जायसवाल ने कहा
झूठे आरोप लगाने से सच्चाई नहीं बदलती। पहले अपने अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार रोकिए।
इसके साथ ही भारत ने अफगानिस्तान, रूस, चीन और कनाडा से जुड़ी कई अहम कूटनीतिक बातें साझा कीं। लेकिन सबसे तीखा संदेश पाकिस्तान के नाम था—
अब PoK की आवाज़ को खामोश करना आसान नहीं।
India Condemns Pakistan Army’s : PoK की सड़कों पर अब सिर्फ धूल नहीं, दर्द उड़ रहा है
पाकिस्तान भले ही झूठ बोले कि सब नियंत्रण में है लेकिन PoK की सड़कों से उठती चीखें, खून में सने कर्फ्यू ऑर्डर और बिखरे हुए पोस्टर कुछ और ही कह रहे हैं। भारत अब चुप नहीं है। और शायद, दुनिया भी अब ज्यादा देर तक इस ‘खामोश नरसंहार’ पर चुप नहीं रह सकेगी। क्या हमें एक बार फिर किसी अंतरराष्ट्रीय मंच से उठनी चाहिए PoK की आजादी की मांग? क्या इंसाफ के लिए लड़ते लोग सिर्फ आंकड़ा बनकर रह जाएंगे? आप क्या सोचते हैं? अपनी राय नीचे कमेंट में ज़रूर दें।
