राहुल गांधी के आवास पर 7 अगस्त को INDIA गठबंधन की डिनर मीटिंग!

सियासी गलियारों में हलचल तेज है। 7 अगस्त को कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आवास पर एक महत्वपूर्ण डिनर मीटिंग होने जा रही है, जिसमें इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) के कई शीर्ष नेता शामिल होंगे। यह दूसरी बैठक होगी इस मानसून सत्र के दौरान, और इसमें आगामी राजनीतिक रणनीति, संभावित आंदोलन की रूपरेखा और एक से ज्यादा संवेदनशील मुद्दों पर विचार-विमर्श संभव है।
डिनर मीटिंग क्यों है खास?
धांधली के दावे और पूर्व कांग्रेस घोषणा
पिछले सप्ताह राहुल गांधी ने कांग्रेस सम्मेलन में दावा किया कि 2024 के आम चुनावों में 70-80 लोकसभा सीटों पर व्यापक धांधली हुई है। यही आरोप अब गठबंधन की राजनीति को फिर से सक्रिय कर रहा है। इसलिए इस बैठक का उद्देश्य सिर्फ चर्चा नहीं, बल्कि एक साझा राजनीतिक अभियान की रूपरेखा तय करना हो सकता है।
बहुआयामी राजनीतिक मसले बैठक की एजेंडा
इस डिनर मीटिंग में जिन मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है, उनमें शामिल हैं:
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बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)
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महाराष्ट्र में मतदाता सूची में कथित हेराफेरी
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ऑपरेशन सिंदूर
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अमेरिका-भारत व्यापार समझौता
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और डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ धमकी के राजनीतिक निहितार्थ
इन सबके बीच एक समन्वित रणनीति बनाने की सादगी ही बैठक की ताकत है।
कौन-कौन आएगा डिनर में?
पहली वर्चुअल बैठक में लगभग 24 नेता शामिल थे इनमें शरद पवार (एनसीपी-SP), तेजस्वी यादव (राजद), उमर अब्दुल्ला (जम्मू-कश्मीर से), हेमंत सोरेन (झारखंड मुख्यमंत्री), उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT)
इस बार भी इन सब नेताओं के साथ फारूक अब्दुल्ला और डी. राजा जैसे दिग्गज हिस्सा लेंगे। फारूक अब्दुल्ला ने बताया कि वह बिहार SIR को विषय बनाएंगे। डी. राजा ने कहा कि किसी विशेष एजेंडे का उल्लेख नहीं हुआ, लेकिन राहुल गांधी सक्रिय रूप से सांसदों को कॉल कर रहे हैं।
भविष्य की रणनीति और आंदोलन
जिन नेताओं के ट्वीट्स और सार्वजनिक बयानों से संकेत मिल रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि बैठक में केंद्र की नीतियों के खिलाफ जनता तक संदेश भेजने की योजना बनाई जा सकती है। चाहे चुनाव आयोग को घेरने की बात हो या सामाजिक आंदोलन की तैयारी यह बैठक स्ट्रेटेजी के लिहाज़ से निर्णायक साबित हो सकती है।

व्यक्तिगत दृष्टि से देखें तो …
जब मैंने दिल्ली में विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि संसद के मानसून सत्र में जिस तरह से कामकाज केवल दो दिन हुआ, वह चिंताजनक है। हंगामे, स्थगन, विरोध हर तरफ अराजकता है। इन हालात में विपक्ष की अंदरूनी बैठक हार या जीत का रास्ता तय कर सकती है।
एक सांसद ने कहा:
“जब सवाल लोकतंत्र की मूल संरचना से जुड़े हों जैसे चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची तो बैठकर सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की जगह समाधान की योजना बनाना ज़रूरी है।”
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