भारत अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ में सिर्फ उपभोक्ता बनकर नहीं रहना चाहता, तो उसे अपने ही डेटा पर आधारित AI मॉडल विकसित करने होंगे। यही साफ संदेश इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के मंच से नीति आयोग के पूर्व सीईओ और पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने दिया। उन्होंने कहा कि आज बड़ी टेक कंपनियां ग्लोबल साउथ, खासकर भारत जैसे देशों के डेटा से अपने एआई मॉडल तैयार कर रही हैं, लेकिन उसका आर्थिक और रणनीतिक लाभ स्थानीय देशों तक नहीं पहुंच रहा। कांत के मुताबिक, “डेटा हमारा है, लेकिन प्रोडक्ट और मुनाफा कहीं और का, यही असमानता भविष्य में और गहरी हो सकती है।”
ग्लोबल साउथ का डेटा, मुनाफा ग्लोबल कंपनियों का
पैनल चर्चा के दौरान कांत ने बताया कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) के प्रशिक्षण में ग्लोबल साउथ के देशों का डेटा बेहद अहम है। भारत अकेले अमेरिका की तुलना में करीब 33 फीसदी ज्यादा डेटा जनरेट करता है। उन्होंने आगाह किया कि इसी डेटा के सहारे वैश्विक टेक कंपनियां अपने व्यावसायिक एआई प्रोडक्ट तैयार कर सकती हैं और बाद में उन्हें ऊंची कीमत पर विकासशील देशों को ही बेच सकती हैं।यही वजह है कि भारत और अन्य विकासशील देशों को अपने डेटा पर आधारित, अपनी जरूरतों के अनुरूप एआई सिस्टम खड़े करने होंगे, ताकि लाभ का संतुलन बना रहे।
युवा आबादी भारत की सबसे बड़ी ताकत
अमिताभ कांत ने कहा कि भारत की जनसांख्यिकी और तकनीकी महत्वाकांक्षा उसे एआई के क्षेत्र में अलग पहचान देती है। युवा आबादी, डिजिटल अपनाने की तेज रफ्तार और एआई को लेकर बढ़ती रुचि यह संकेत देती है कि यह तकनीक आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था और प्रशासन दोनों को बदल सकती है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में AI, डॉक्टरों का विकल्प नहीं
समिट के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने स्वास्थ्य सेवाओं में एआई की भूमिका पर बात की। उन्होंने साफ किया कि एआई डॉक्टरों की जगह नहीं लेगा, बल्कि उनके काम को आसान बनाएगा.उनके मुताबिक, एआई नियमित और समय लेने वाले कार्यों का बोझ कम कर सकता है, जिससे डॉक्टर गंभीर और जटिल मामलों पर ज्यादा ध्यान दे सकें। उन्होंने मेडिकल समुदाय में एआई साक्षरता बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
समिट से बाहर हुए बिल गेट्स
इस बीच समिट को लेकर एक और अहम अपडेट सामने आया। बिल गेट्स अब इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में शामिल नहीं होंगे. सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में 16 से 20 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन की आधिकारिक वेबसाइट से उनका नाम वक्ताओं की सूची से हटा दिया गया है.बताया गया है कि यह फैसला हाल में सामने आए कुछ दस्तावेजों के संदर्भ में लिया गया है, जो दिवंगत यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों से संबंधित हैं। हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी भी पीड़ित ने बिल गेट्स पर कोई सीधा आरोप नहीं लगाया है और उनके खिलाफ कोई आपराधिक शिकायत दर्ज नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारत एआई को लेकर सिर्फ बहस तक सीमित रहता है या अपने डेटा और संसाधनों के दम पर वाकई स्वदेशी तकनीकी मॉडल खड़े करने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाता है।
