Saurabh Sharma Case: भोपाल में चर्चित रहे परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा केस में अब आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। जांच के बाद आयकर विभाग की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने माना है कि बरामद सोना और नकदी बेनामी लेनदेन से जुड़ी संपत्ति है.इसके साथ ही करीब 100 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त करने का रास्ता साफ हो गया है। भोपाल की बेनामी निषेध इकाई ने पहले जो कार्रवाई की थी, उसे भी अथॉरिटी ने सही ठहराया है।
Saurabh Sharma Case: जांच में सौरभ शर्मा असली मालिक
जांच के दौरान यह सामने आया कि जब्त किए गए सोने और नकदी का वास्तविक मालिक सौरभ शर्मा ही है। जबकि उसके सहयोगी चेतन सिंह गौर को इस मामले में बेनामीदार घोषित किया गया है.अथॉरिटी के फैसले के बाद अब इन संपत्तियों को स्थायी रूप से जब्त करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
Saurabh Sharma Case: अपील का मौका, नहीं तो होगी नीलामी
अधिकारियों के मुताबिक सौरभ शर्मा और चेतन सिंह गौर को इस फैसले के खिलाफ अपील करने का अवसर दिया जाएगा.अगर तय समय के भीतर अपील नहीं की गई, या अपील खारिज हो गई, तो केंद्र सरकार जब्त किए गए सोने और नकदी को अपने कब्जे में लेकर नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। भोपाल स्थित आयकर विभाग की बेनामी निषेध इकाई ने पीबीपीटी अधिनियम 1988 के तहत अगस्त 2025 में इस संपत्ति को अस्थायी रूप से कुर्क किया था.उस समय बरामद सोना, नकदी और एक इनोवा कार की कीमत करीब 52 करोड़ रुपये आंकी गई थी। लेकिन मौजूदा बाजार कीमत के हिसाब से इसकी कुल वैल्यू अब करीब 100 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
मेंडोरी के जंगल में कार से मिला था सोना
यह मामला दिसंबर 2024 में उस वक्त सामने आया था जब विभिन्न जांच एजेंसियों ने भोपाल में सौरभ शर्मा से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की थी.उसी दौरान 18-19 दिसंबर की रात में मेंडोरी क्षेत्र में खड़ी एक इनोवा कार से करीब 51.8 किलो सोना और लगभग 11 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे.प्रारंभिक जांच में एजेंसियों ने इस संपत्ति का संबंध सौरभ शर्मा से जोड़ा था, हालांकि पूछताछ के दौरान उसने इन संपत्तियों पर अपना दावा स्वीकार नहीं किया।
कई एजेंसियां कर रही हैं जांच
इस पूरे मामले की जांच अभी कई एजेंसियां शामिल हैं इनमे आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ED). लोकायुक्त. राजस्व खुफिया निदेशालय, पुलिस जांच एजेंसियां सौरभ शर्मा और उससे जुड़े लोगों की 32 से अधिक अचल संपत्तियों और बैंक खातों की भी पड़ताल कर रही हैं.अधिकारियों के अनुसार अब मुख्य सवाल यह है कि यह अवैध कमाई किन-किन माध्यमों से निवेश की गई और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं। आने वाले समय में जांच से इस पूरे नेटवर्क की और परतें खुल सकती हैं।
