MP BJP: मध्य प्रदेश में बीजेपी जिलाध्यक्षों पर दिल्ली और भाेपाल में लगातार मंथन चल रहा, अब प्रदेश अध्यक्ष का चनाव भी अटक गया है। आपके बता दें की भाजपा देश में सबसे आदर्श संगठन है। मध्य प्रदेश में भाजपा के संगठन में संभवत ये पहला मौका होगा जब जिलाध्यक्ष के चुनाव में प्रदेश नेतृत्व को पसीने छूटे और मामला दिल्ली तलक चला गया है। जहां दिग्गजों की गुटबाजी के कारण किसी एक नाम पर सहमति नहीं बन पा रही है। यही एक कारण है की 5 जनवरी तक घोषित हो जाने वाली जिलाध्यक्षों की सूची अटकी हुई है, आपकाे बता दें की इसके कारण प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव भी आगे खिंच गया है।
MP BJP: ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के कारण बीजेपी में गुटबाजी बढ़ गयी है। इसी कारण जिलाध्यक्ष के नाम को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान ग्वालियर चंबल के इलाके में है।
जिला अध्यक्षाें की सूची पंहुची भाेपाल से दिल्ली दरबार
MP BJP: पर्यवेक्षकों के फीडबैक काे भी तीन दिन से ज्यादा का समय गुजर चुका है, लेकिन बीजेपी में जिला अध्यक्षों की सूची की घोषणा नहीं हाे पाई है। कहा जा सकता है की जब प्रदेश का नेतृत्व उलझी हुई जिला इकाइयों की गुत्थी सुलझाने में नाकाम रहा, तो सूची समेत नेताओं को दिल्ली पहुंचना पड़ा। माना जा रहा है कि अब दिल्ली से फाइनल होकर सूची बाहर आएगी, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा, संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा दिल्ली में जिला अध्यक्षों की सूची को लेकर बैठक के लिए बुलाए गए हैं।
MP BJP: माना जा रहा है कि अब दिल्ली से ही सारे विवाद सुलझाने के बाद सूची जारी होगी। प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल का कहना है कि “बीजेपी देश का सबसे बड़ा राजनीतिक दल है. पूरी प्रक्रिया के साथ पारदर्शिता के साथ पार्टी में चुनाव प्रक्रिया चल ही है. लोकतांत्रिक तरीके से संगठन के चुनाव हो रहे हैं. जब सूची तैयार हो जाएगी ताे नए जिला अध्यक्ष के नाम के साथ ये घोषित कर दी जाएगी.”
ग्वालियर चंबल में भाजपा बटी खेमे मे

ग्वालियर चंबल के इलाके में ज्याेतिरादित्य सिंधिया के आने के बाद समीकरण बदल गये हैं।ग्वालियर चंबल में ग्वालियर ग्रामीण, शिवपुरी, अशोकनगर और भिंड में नाम को लेकर एक राय नहीं बन पा रही है. यहां तोमर खेमा और सिंधिया खेमा तो है ही, इसके अलावा विवेक शेजवलकर के भी समर्थक हैं।बुंदेलखंड में भी गोविंद सिंह राजपूत, गोपाल भार्गव से लेकर भूपेन्द्र सिंह जैसे दिग्गजों में जिला अध्यक्ष के पद के लिए अपने अपने समर्थकों को बिठाने घमासान मचा हुआ है।
प्रक्रिया बदली,ताे सूची में देरी क्याें
पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुंदन शर्मा कहते हैं, तब निर्वाचन पध्दति को ये कहकर खत्म किया गया था कि इस तरह के चुनाव से गुटबाजी बढ़ती है. अभी उसके मुकाबले रायशुमारी में नाम केवल तीन लोगों को पता होते हैं. लेकिन तब जो चुनाव लड़ते थे तो उनके गुट आमने सामने आ जाते थे. और कहा गया कि इससे पार्टी के भीतर की जो सामंजस्य और सद्भाव है वो आहत होता है. लेकिन अब जब ज्यादा आसान पध्दति है तब भी जिलाध्यक्षों के नामों की घोषणा में देरी हो रही है.
