Kailash Mansarovar: भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार के साथ, कैलाश मानसरोवर यात्रा इस साल गर्मी में फिर से शुरू होगी। इसके अलावा, भारत और चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स की सर्विस भी शुरू की जाएगी। हालांकि, इस नई सेवा की शुरुआत की तारीख अभी तय नहीं की गई है।

यह जानकारी सोमवार को भारतीय विदेश मंत्रालय द्वारा एक बयान में दी गई, जिसमें बताया गया कि इन दोनों महत्वपूर्ण फैसलों पर बीजिंग में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्त्री और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच दो दिन तक चली बैठक में सहमति बनी।
Kailash Mansarovar: भारत-चीन के बीच सहयोग बढ़ाने के प्रयास
1.डायरेक्ट फ्लाइट्स: भारत और चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स की शुरुआत के लिए दोनों देशों की तकनीकी टीमों के बीच जल्द ही बातचीत होगी।
2.सांस्कृतिक और मीडिया सहयोग: दोनों देशों के मीडिया और थिंक टैंक के बीच संवाद को प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि आपसी सहयोग और समझ बढ़ सके।
3.75वीं वर्षगांठ का आयोजन: भारत-चीन रिश्तों की 75वीं वर्षगांठ को मिलकर मनाने के लिए दोनों देश साथ मिलकर काम करेंगे।
4.हाइड्रोलॉजिकल डेटा और सीमा सहयोग: सीमा पार नदियों पर सहयोग बढ़ाने और हाइड्रोलॉजिकल डेटा के आदान-प्रदान के लिए एक एक्सपर्ट लेवल मीटिंग आयोजित की जाएगी।

Kailash Mansarovar: ऐतिहासिक समझौते और कैलाश मानसरोवर यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 2023 में रूस के कजान में हुई बैठक के बाद, इन फैसलों को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए। सीमा विवाद के क्षेत्रों में तनाव कम होने के बाद, कैलाश मानसरोवर यात्रा और फ्लाइट सेवा फिर से शुरू की जा रही है।
2020 से पहले, भारत और चीन के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन सीमा विवाद और कोविड महामारी के कारण यह सेवा बंद कर दी गई थी। 2020 से पहले, हर साल लगभग 50,000 भारतीय श्रद्धालु इस पवित्र स्थल की यात्रा करते थे।
Kailash Mansarovar: कैलाश मानसरोवर: एक पवित्र स्थल
कैलाश पर्वत, जो हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास स्थल माना जाता है, तिब्बत में स्थित है, जिसे चीन नियंत्रित करता है। यह स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, और यात्रा के लिए चीन से विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है।
भारत और चीन के बीच 2013 और 2014 में हुए दो प्रमुख समझौतों ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को आसान बना दिया था, लेकिन 2020 से यात्रा पर रोक लग गई थी।

Kailash Mansarovar: कैलाश पर्वत की चढ़ाई
हालांकि कैलाश पर्वत की ऊंचाई एवरेस्ट से कम है, लेकिन इसके ऊपर चढ़ाई करना अत्यधिक कठिन है। यह पर्वत 65 डिग्री के एंगल पर खड़ा है, जबकि माउंट एवरेस्ट का एंगल 40-50 डिग्री का है। इस पर्वत पर चढ़ाई की कई कोशिशें हुई हैं, लेकिन अब कैलाश पर चढ़ाई पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
Kailash Mansarovar: उत्तराखंड से कैलाश के दर्शन
कैलाश मानसरोवर यात्रा बंद होने के बाद से श्रद्धालु उत्तराखंड की व्यास घाटी से कैलाश पर्वत के दर्शन कर रहे हैं। पिछले साल उत्तराखंड पर्यटन विभाग और अन्य एजेंसियों ने कैलाश पर्वत को स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाली जगह की खोज की थी। 2024 में, भारत के पिथौरागढ़ जिले के व्यास घाटी से कैलाश पर्वत के दर्शन की पहली बार सुविधा उपलब्ध हुई थी।
इस बार की यात्रा और फ्लाइट सेवा का पुनः आरंभ भारत और चीन के बीच संबंधों में नए अध्याय की शुरुआत कर सकता है, जो दोनों देशों के लिए एक सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।
