Imf loan : IMF की बैठक में भारत का बड़ा दांव!
Imf loan : आज, 9 मई 2025, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एक ऐसी बैठक हो रही है, जो न केवल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, बल्कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों पर भी गहरा असर डाल सकती है। इस बैठक में फैसला होगा कि क्या पाकिस्तान को 1.3 अरब डॉलर (लगभग 11,113 करोड़ रुपये) का नया कर्ज मिलेगा, जो क्लाइमेट रेजिलिएंस लोन प्रोग्राम के तहत दिया जाना है। लेकिन इस बीच, भारत इस कर्ज के खिलाफ मजबूती से अपनी आवाज उठाने की तैयारी में है। आखिर क्यों? क्या है इस बैठक का पूरा माजरा? चलिए, इस खबर को आसान और रोचक तरीके से समझते हैं।
पाकिस्तान को 11,000 करोड़ का कर्ज: क्या है मसला?
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से संकट में है। कर्ज के बोझ तले दबी इस अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आईएमएफ ने जुलाई 2024 में 7 अरब डॉलर (करीब 59,000 करोड़ रुपये) के राहत पैकेज को मंजूरी दी थी। यह पैकेज 37 महीने के लिए विस्तारित निधि सुविधा (ईएफएफ) के तहत दिया गया, जिसके तहत पाकिस्तान को समय-समय पर किश्तें मिलेंगी। आज की बैठक में इसी पैकेज की पहली समीक्षा होनी है, जिसमें यह तय होगा कि अगली किश्त, यानी करीब 1 अरब डॉलर, पाकिस्तान को दी जाए या नहीं।
खास बात: इसके अलावा, आईएमएफ एक और 1.3 अरब डॉलर के कर्ज पर विचार कर रहा है, जो क्लाइमेट रेजिलिएंस प्रोग्राम के तहत होगा। यह राशि पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए दी जानी है, लेकिन भारत का मानना है कि इसका दुरुपयोग हो सकता है।
भारत क्यों कर रहा है विरोध?
पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए, और भारत द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन सिंदूर ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक मदद का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने या सैन्य गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से भारत ने आईएमएफ से पाकिस्तान को दिए जा रहे कर्ज की समीक्षा करने की मांग की थी।
भारत ने साफ कहा है कि वह नहीं चाहता कि पाकिस्तान को कोई ऐसी मदद मिले, जिसका इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया जाए। सूत्रों के मुताबिक, भारत इस बैठक में अपनी बात मजबूती से रखेगा और कर्ज के दुरुपयोग की आशंका को उजागर करेगा।
आईएमएफ का रुख: क्या बदलेगा फैसला?
हालांकि भारत ने कर्ज की समीक्षा की मांग की थी, लेकिन आईएमएफ ने इस अनुरोध को ठुकरा दिया है। आईएमएफ के प्रवक्ता माहिर बिनीसी ने कहा, “9 मई की बैठक तय कार्यक्रम के अनुसार होगी, इसमें कोई बदलाव नहीं है।” इसका मतलब है कि आईएमएफ पाकिस्तान के साथ अपने मौजूदा समझौते पर आगे बढ़ने को तैयार है।
पाकिस्तान का दावा है कि उसकी अर्थव्यवस्था इस राहत पैकेज की बदौलत स्थिर हो रही है। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने कहा, “हमारा आईएमएफ प्रोग्राम पूरी तरह पटरी पर है। हाल की समीक्षा अच्छी रही है।” लेकिन भारत का मानना है कि यह स्थिरता केवल सतही है और कर्ज का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
7 अरब डॉलर का पैकेज: अब तक क्या हुआ?
जुलाई 2024 में शुरू हुए 7 अरब डॉलर के पैकेज के तहत पाकिस्तान को पहली किश्त के रूप में 1 अरब डॉलर मिल चुके हैं। बाकी राशि 37 महीनों में छह समीक्षाओं के बाद दी जाएगी। इस पैकेज का मकसद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, मुद्रास्फीति को कम करना, और निजी क्षेत्र को बढ़ावा देना है। लेकिन कई विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कर्ज के जाल में फंसी है।
चौंकाने वाला तथ्य: जून 2024 के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान पर कुल 256 अरब डॉलर (21.6 लाख करोड़ रुपये) का कर्ज है, जो उसकी जीडीपी का 67% है।
अर्थव्यवस्था पर कर्ज का जाल
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कर्ज पर टिकी है। तेल, गैस, और रोजमर्रा के खर्चों से लेकर सरकारी तनख्वाह और सब्सिडी तक, सब कुछ कर्ज के दम पर चल रहा है। हर पाकिस्तानी बच्चा जन्म के समय 86,500 रुपये के कर्ज के साथ पैदा होता है। ऐसे में, आईएमएफ का यह कर्ज पाकिस्तान के लिए कितना फायदेमंद होगा, यह एक बड़ा सवाल है।
पाकिस्तान को अगले चार साल में 100 अरब डॉलर (8.4 लाख करोड़ रुपये) का विदेशी कर्ज चुकाना है। जुलाई 2025 तक उसे 30.35 अरब डॉलर (2.56 लाख करोड़ रुपये) का भुगतान करना है। लेकिन उसके पास विदेशी मुद्रा भंडार केवल 14 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो इस कर्ज का आधा भी नहीं है।
भारत की रणनीति: क्या होगा असर?
भारत ने इस बैठक में अपनी बात रखने के लिए परमेश्वरन अय्यर को चुना है, जो आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत का विरोध केवल कर्ज को रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े कूटनीतिक दबाव का हिस्सा है। पहलगाम हमले के बाद भारत ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रुख अपनाएगा।
वहीं, पाकिस्तान का कहना है कि भारत का विरोध “राजनीति से प्रेरित” है। लेकिन भारत का तर्क है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी लड़ाई वैश्विक सुरक्षा से जुड़ी है, और आईएमएफ को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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आगे क्या?
आज की बैठक का नतीजा न केवल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था, बल्कि भारत-पाकिस्तान रिश्तों पर भी असर डालेगा। अगर आईएमएफ भारत की बात मानता है, तो पाकिस्तान को बड़ा झटका लग सकता है। लेकिन अगर कर्ज मंजूर हो जाता है, तो भारत को अपनी कूटनीतिक रणनीति पर और काम करना होगा।
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