shubhanshu shukla : इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के लिए क्वारंटीन हुए शुभांशु शुक्ला
shubhanshu shukla : भारतीय एयरफोर्स के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला जल्द ही अंतरिक्ष में कदम रखने जा रहे हैं। वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरने वाले पहले भारतीय बनेंगे। इस ऐतिहासिक मिशन को एक्सिओम मिशन 4 के तहत अंजाम दिया जाएगा, और वह 8 जून, 2023 को स्पेस में जाएंगे।
इससे पहले, भारत के राकेश शर्मा ने 1984 में सोवियत यूनियन के स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष यात्रा की थी। अब शुभांशु शुक्ला का यह मिशन भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
क्वारंटीन में पहुंचे शुभांशु शुक्ला, बोले- मिशन सफल होगा
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन जाने से पहले, शुभांशु शुक्ला और उनके तीन साथी एस्ट्रोनॉट्स को क्वारंटीन में भेजा गया है। यह प्रक्रिया अत्यधिक महत्वपूर्ण है ताकि मिशन के दौरान किसी भी प्रकार का संक्रमण न फैले और एस्ट्रोनॉट्स स्वस्थ रहें।
इस दौरान शुभांशु ने मीडिया से कहा, “मुझे पूरा विश्वास है कि एक्सिओम मिशन सफल होगा। यह कमर्शियल स्पेस फ्लाइट के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और भविष्य में ऐसे और मिशन होंगे।”
एक्सिओम स्पेस ने इस ऐतिहासिक मिशन के क्रू को विदाई दी, जिसमें उन्हें पारंपरिक तरीके से सम्मानित किया गया।
मिशन में शामिल एस्ट्रोनॉट्स और मिशन का उद्देश्य
एक्सिओम 4 मिशन में चार देशों के एस्ट्रोनॉट्स शामिल होंगे। इनके अलावा, पोलैंड और हंगरी के एस्ट्रोनॉट्स भी स्पेस में जाने वाले हैं।
- शुभांशु शुक्ला (भारत)
- स्लावोज़ उज़्नान्स्की (पोलैंड) – 1978 के बाद स्पेस में जाने वाले पोलैंड के दूसरे एस्ट्रोनॉट
- टिबोर कापू (हंगरी) – 1980 के बाद स्पेस में जाने वाले हंगरी के दूसरे एस्ट्रोनॉट
- पैगी व्हिटसन (अमेरिका) – यह उनका दूसरा कॉमर्शियल ह्यूमन स्पेस फ्लाइट मिशन है
इन सभी एस्ट्रोनॉट्स ने नासा में 8 महीने की ट्रेनिंग पूरी की है और अब वे मिशन की तैयारी में जुटे हैं।
मिशन का उद्देश्य और वैज्ञानिक अनुसंधान
एक्सिओम मिशन 4 का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रौद्योगिकी परीक्षण करना है। इसके तहत कई महत्वपूर्ण प्रयोग किए जाएंगे, जैसे:
- माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग – पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बाहर कई तरह के प्रयोग किए जाएंगे।
- नई तकनीकों का परीक्षण – अंतरिक्ष में नई और अत्याधुनिक तकनीकों का परीक्षण।
- अंतरराष्ट्रीय सहयोग – विभिन्न देशों के एस्ट्रोनॉट्स को एक साथ लाकर अंतरिक्ष मिशन को सफल बनाना।
- एजुकेशनल एक्टिविटी – पृथ्वी पर लोगों को प्रेरित करना और अंतरिक्ष यात्रा की महत्वपूर्ण जानकारी देना।
यह मिशन एक्सिओम स्पेस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका उद्देश्य प्राइवेट स्पेस ट्रैवल को बढ़ावा देना और भविष्य में एक कॉमर्शियल स्पेस स्टेशन स्थापित करना है।
शुभांशु शुक्ला एक अनुभवी पायलट
शुभांशु शुक्ला का सफर बहुत प्रेरणादायक है। उनका जन्म लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा सिटी मॉन्टेसरी स्कूल से पूरी की और फिर नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में एडमिशन लिया।
शुभांशु ने भारतीय वायुसेना में एक फाइटर पायलट के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। उनके पास 2,000 घंटे से अधिक का फ्लाइंग एक्सपीरियंस है और उन्होंने सुखोई-30 MKI, मिग-21, मिग-29 जैसे लड़ाकू विमानों को उड़ाया है।
मार्च 2024 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोट किया गया। वे एक फाइटर कॉम्बैट लीडर भी हैं। उनके अनुभव और समर्पण के कारण ही उन्हें इस ऐतिहासिक मिशन के लिए चुना गया।
ड्रैगन कैप्सूल से उड़ान: स्पेस मिशन की तैयारी
मिशन के दौरान एस्ट्रोनॉट्स स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल में यात्रा करेंगे, जो फाल्कन-9 रॉकेट से नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा।
ISS (इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन) पृथ्वी के चारों ओर घूमता है और इसमें एस्ट्रोनॉट्स विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं। ISS की यात्रा के दौरान, एस्ट्रोनॉट्स को माइक्रोग्रैविटी का अनुभव होता है, जिससे विभिन्न प्रकार के अनूठे प्रयोग किए जाते हैं।
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) क्या है?
ISS पृथ्वी के चारों ओर 28,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घूमता है और हर 90 मिनट में पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करता है। यह स्टेशन पाँच प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियों की साझेदारी से बना है और इसमें एस्ट्रोनॉट्स के लिए रहन-सहन की व्यवस्था की गई है।
एक ऐतिहासिक कदम
शुभांशु शुक्ला का एक्सिओम मिशन 4 में हिस्सा लेना एक ऐतिहासिक और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण घटना है। यह न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे अंतरिक्ष समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत, पोलैंड, हंगरी और अमेरिका के एस्ट्रोनॉट्स इस मिशन का हिस्सा बनेंगे, और वे सभी अंतरिक्ष में नए आयाम तलाशेंगे।
शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा भारतीय एस्ट्रोनॉट्स के लिए एक प्रेरणा बनकर सामने आएगी, और यह भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक नया अध्याय होगा।
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