भोपाल पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसा खुलासा हुआ है जो वन्यजीव संरक्षण कानूनों की गंभीर अनदेखी को दर्शाता है। टीला जमालपुरा थाना क्षेत्र से कुख्यात शिकारी जफर बैग उर्फ धार को गिरफ्तार किया गया है, जो संरक्षित प्रजातियों का शिकार कर उनका मांस शादी और पार्टियों में बेचता था।
लाइसेंसी राइफल और छुरी बरामद
गिरफ्तारी के समय आरोपी के पास से 315 बोर की लाइसेंसी राइफल और एक छुरी बरामद की गई। पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि जफर एक संगठित गिरोह का हिस्सा है, जो वन्यजीवों का शिकार कर ऑर्डर पर मीट सप्लाई करता था।
300 से 500 रुपए किलो बिकता था मीट
आरोपी ने कबूला कि वह काले हिरण सहित अन्य वन्य प्राणियों का मीट 300 से 500 रुपए प्रति किलो की दर से बेचता था। खास बात यह थी कि आयोजकों को यह जानकारी नहीं होती थी कि मीट अवैध शिकार का है। यह मीट शादी-पार्टियों में मेन्यू का हिस्सा बनकर परोसा जाता था।
फहीम बम गिरोह से कनेक्शन, नेटवर्क पूरे प्रदेश में
पुलिस के अनुसार जफर का संबंध कुख्यात अपराधी फहीम बम से है, जो इस अवैध धंधे का मुख्य सरगना है। यह गिरोह राजगढ़, सागर, रायसेन, तवा डेम और चिड़ीखो के जंगलों में शिकार करता था। आरोपी ने स्वीकार किया कि शिकार के लिए काली और सफेद स्कॉर्पियो गाड़ियों का इस्तेमाल होता था, जिन्हें जल्द जब्त किया जाएगा।
तलैया में मीट मिलने से खुली पोल
पूरा मामला तब सामने आया जब 11 जुलाई को तलैया इलाके में फहीम के घर पर वन विभाग ने छापा मारा। वहां वन्य प्राणियों का मीट बरामद हुआ। फहीम का बेटा हुजेफा शेख गिरफ्तार हुआ और उसने पूछताछ में जफर का नाम लिया।
वन विभाग के हवाले किया गया आरोपी
पुलिस ने कार्रवाई के बाद जफर को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया है। अब वन विभाग की टीम गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है। साथ ही यह जांच भी की जा रही है कि किन आयोजनों में यह मांस सप्लाई किया गया था और इसमें कौन-कौन शामिल था।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, काला हिरण भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल है और इसका शिकार करना गंभीर दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद गिरोह संगठित रूप से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था।
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