Deepfake video: छत्तीसगढ़ के छोटे-छोटे शहरों में एक नई चिंता जन्म ले रही है, ऐसा खतरा जो घर बैठे डिजिटल दुनिया से हमारे घरों तक पहुँच चुका है।अब तस्वीरें या वीडियो केवल कैमरे से नहीं, बल्कि Ai की मदद से बनाया जा सकता है और यही आज शुरुआत नहीं, बल्कि कई परिवारों की जिंदगी बर्बाद कर रहा है।
Deepfake video: एक तकनीक, कई सवाल
लोग हमेशा कहते थे कि “तस्वीर बोलती है।” आज वही तस्वीर झूठ भी बोल सकती है। एआई टूल्स अब बेहद आसानी से फर्जी फोटो और वीडियो तैयार कर देते हैं, बिना किसी असली मौजूदगी के लोगों को इसका अंदाज़ नहीं था कि जल्द-से-जल्द यह तकनीक उनके निजी जीवन तक पहुँच जाएगी, और उस पहुँच का इस्तेमाल बदनामी, ब्लैकमेलिंग और मानसिक उत्पीड़न के लिए होने लगेगा।
Deepfake video: बनबंधा गांव की कहानी
कोरबा जिले के पाली थाना क्षेत्र के बनबंधा गांव में एक नाबालिग लड़की के साथ ऐसी ही डरावनी घटना घटी। परिवार ने बताया कि एक परिचित, 25 वर्षीय रतिराम यादव ने लड़की का एआई से बनाया हुआ अश्लील वीडियो व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल कर दिया। उन्होंने दो हफ्ते पहले पाली थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। परिवार चिंतित है कि लड़की और घर दोनों ही समाज के ताने-बाने का सामना कैसे करेंगे।
रायपुर में भी नहीं रहा मौक़ा
नया रायपुर के ट्रिपल आईटी कॉलेज में छात्र ने एआई से 30-36 महिला छात्राओं के 1000 से अधिक फर्जी अश्लील फोटो-वीडियो तैयार किए।पूरा मामला सामने आते ही छात्र को पुलिस ने पकड़ा और कॉलेज ने उसे निष्कासित कर दिया।
सक्ती जिला: नाम बदल गया अपराध में
सक्ती के एक चॉइस सेंटर संचालक के ख़िलाफ़ भी मामला दर्ज हुआ, जहाँ उसने एक युवती की फर्जी इमेज एआई से बनाया और ग्रुप में शेयर कर दिया।ये सिर्फ तकनीकी करतब नहीं यह सीधे लोगों की इज़्ज़त और ज़िंदगी से खिलवाड़ है।
आंकड़े संख्या नहीं चेतावनी
साइबर क्राइम से जुड़ी सरकारी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ में लगभग 200 साइबर पॉर्नोग्राफी करीब दर्ज किए गए मामलों में ऐसे कइयों में एआई-जनरेटेड कंटेंट भी शामिल माना जा सकता है। यह सिर्फ संख्या नहीं है, यह एक चेतावनी का संकेत है।
जागरूकता ही ताकत
विशेषज्ञ कहते हैं कि:बच्चों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के बारे में सिखाना ज़रूरी है।अगर कोई फर्जी फोटो या वीडियो बनता है, तो लिंक्स शेयर न करें और तत्काल रिपोर्ट करें।साइबर हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत दर्ज कराएँ। सबूत संभालकर रखें, ताकि कार्रवाई तेज़ हो सके।किसी भी मौक़े पर चुप्पी रखने से बचें।
