How to Control Anger: आज की तेज भाग दौड़ भरी जिंदगी में तनाव और दबाव ने इंसान के स्वभाव को काफी हद तक प्रभावित किया है। इसकी वजह से छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, चिड़चिड़ापन और खुद पर नियंत्रण खो बैठना अब आम होता जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह अनियंत्रित गुस्सा न सिर्फ आपके रिश्तों को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि आपकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर भी बुरा असर डालता है? आज हम गुस्सा कंट्रोल करने के बारें मे बताएंगे।
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आखिर गुस्सा क्यों आता है?
गुस्सा एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है जो तब आती है जब व्यक्ति को अन्याय, अपमान, असहयोग, या अस्वीकार जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कभी-कभी गुस्सा अधूरी अपेक्षाओं या मानसिक थकावट की वजह से भी हो सकता है। कई बार हम अपनी भावनाओं को दबाते हैं और जब सहनशक्ति की सीमा पार हो जाती है, तो यह गुस्से के रूप में फूट पड़ता है।

इसके अलावा, नींद की कमी, भूख, नशा, या शारीरिक थकान भी गुस्से को बढ़ावा दे सकते हैं।
गुस्से की वजह से होते है, ये नुकसान..
1. बार-बार गुस्सा आना डिप्रेशन, एंग्जायटी और स्ट्रेस का बढ़ना मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालता है। यह सोचने-समझने की शक्ति को भी कमजोर करता है।
2. गुस्से में बोले गए कठोर शब्द रिश्तों को तोड़ सकते हैं। यह परिवार, दोस्तों और सहकर्मियों से दूरी बना सकता है।
3. ज्यादा गुस्सा करने वाले लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां, माइग्रेन और पाचन संबंधी समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती है।
4. गुस्सा कार्यस्थल पर प्रोडक्टिविटी को प्रभावित करता है। इससे टीमवर्क, कम्युनिकेशन और निर्णय क्षमता कम होती है।

गुस्से को कंट्रोल करने के उपाय..
गहरी सांस लेना और 10 तक उल्टी गिनती गिनना..
जब भी गुस्सा आए, तुरंत प्रतिक्रिया देने की बजाय कुछ पल रुकें। गहरी सांस लें और 10 से 1 तक उल्टी गिनती करें। यह आपके दिमाग को गुस्से से दूर करने और आपको शांत करने में मदद कर सकता । इससे दिमाग को ठंडक मिलती है और प्रतिक्रिया में संतुलन आता है।
मेडिटेशन और योग गुस्से को नियत्रित करने में सहायक..
नियमित ध्यान (Meditation) और योग मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। सुबह का 15-20 मिनट का ध्यान पूरे दिन की मानसिक स्थिति को शांत रख सकता है। योगासन जैसे प्राणायाम, शवासन, भ्रामरी आदि गुस्से पर नियंत्रण में कारगर होते हैं।
अपने गुस्से की वजह को पहचानें…
गुस्से की जड़ को समझना बेहद जरूरी है। क्या यह किसी व्यक्ति की बात से हुआ, किसी पुरानी बात से, या खुद की असफलता से? जब आप कारण समझ लेते हैं, तो समाधान निकालना आसान हो जाता है।
खुद को थोड़ी देर के लिए स्थिति से दूर करें…
अगर किसी से बहस या झगड़े में गुस्सा बढ़ रहा है, तो वहां से कुछ देर के लिए चले जाएं। क्योकि गुस्से में इंसान जो नहीं कहना होता है, वो कह देते हैं। इसलिए शांत होने के बाद स्थिति को संभालना बेहतर होता है।
व्यायाम और शारीरिक गतिविधियां करें…
शारीरिक गतिविधियां जैसे दौड़ना, वॉक करना, डांस करना या जिम जाना नकारात्मक ऊर्जा को निकालने में मदद करते हैं। यह मूड को बेहतर बनाते हैं और गुस्सा कम होता है।
सकारात्मक सोच विकसित करें…
हर स्थिति में गुस्सा करना जरूरी नहीं। सोच बदलने से प्रतिक्रिया भी बदलती है। किसी की गलती पर फौरन नाराज होने की बजाय सोचें कि क्या वह जानबूझकर था या संयोगवश।

डायरी में अपनी बाते लिखें…
आप अपने साथ हुई घटनाओ और अपने गुस्से, अनुभवों और भावनाओं को एक डायरी में लिखें। इससे आपको खुद को बेहतर समझने में मदद मिलेगी। यह एक थेरेपी जैसा काम करता है।
पसंदीदा हॉबी को अपनाएं…
गुस्से के समय में खुद को किसी दूसरी गतिविधि में व्यस्त कर लें। आपकी जो पसंदीदा हॉबी हो उसे करें। गाना गाएं, डांस करें, पेटिंग करें ऐसी कई चीजे जिसे करके आपको खुशी मिलती है, वो करें इससे आप अपना गुस्सा भूल जाएंगे। और आपको बेहतर महसूस होगा।
अच्छी नींद और सही खान-पान रखें..
नींद की कमी और खराब डाइट की वजह से आप गुस्सा करने लगते है, चिड़चिड़ापन होता है, और मानसिक स्वास्थ पर भी असर पड़ता है। इसलिए रोजाना 7–8 घंटे की नींद और पौष्टिक भोजन गुस्से को काबू करने में मददगार होता है।
मनोचिकित्सक की मदद लें…
अगर गुस्सा बहुत तीव्र और बार-बार आता है, जिससे आपके रिश्ते या जीवन प्रभावित हो रहा है, तो किसी मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद जरूर लें। काउंसलिंग, थेरेपी और एंगर मैनेजमेंट कोर्स बेहद उपयोगी हो सकते हैं। इससे आपको गुस्सा कंट्रोल करने में मदद मिलेगा।
