शिवभक्ति की चरम अभिव्यक्ति, सावन और कावड़ यात्रा
Shiva blessings Kanwar rule: सावन का महीना शिवभक्तों के लिए अत्यंत पावन होता है। इस दौरान भक्तगण सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा कर पवित्र नदियों से जल भरकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं। यह कावड़ यात्रा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा, संकल्प और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
मनोकामना पूरी होने पर कितनी बार चढ़ाएं कावड़?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि भगवान शिव किसी विशेष मनोकामना को पूर्ण कर देते हैं, तो कम से कम एक बार कावड़ लेकर जल अर्पण करना अनिवार्य माना गया है। यह ईश्वर के प्रति आभार और कृतज्ञता व्यक्त करने का माध्यम होता है। कुछ भक्त तीन, पाँच या ग्यारह बार कावड़ चढ़ाने का संकल्प लेते हैं।
यह पूरी तरह आस्था और संकल्प पर निर्भर
कावड़ कितनी बार चढ़ानी है, इसका कोई निश्चित धार्मिक नियम नहीं है। यह पूरी तरह से व्यक्ति की श्रद्धा, आस्था और संकल्प पर आधारित होता है। कुछ लोग हर साल कावड़ यात्रा करते हैं, जबकि कुछ केवल एक बार मनोकामना पूर्ण होने पर यह संकल्प पूरा करते हैं।
कावड़ यात्रा के धार्मिक नियम
कावड़ यात्रा सदैव पैदल और नंगे पांव पूरी की जाती है। जल किसी पवित्र नदी, विशेषकर गंगा से लिया जाता है। यात्रा के दौरान कावड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता। इसे शुद्धता और पवित्रता के साथ उठाए रखना आवश्यक होता है।
संकल्पित कावड़ की विशेष सावधानी
जब कोई भक्त विशेष मनोकामना की पूर्ति के लिए कावड़ चढ़ाता है, तो उसे ‘संकल्पित कावड़’ कहा जाता है। इस प्रकार की यात्रा और जल अर्पण को अत्यंत नियमबद्ध, संयमित और श्रद्धा के साथ पूरा करना जरूरी होता है। यह संकल्प भक्त और भगवान के बीच की एक पवित्र डोर मानी जाती है।
Shiva blessings Kanwar rule: इस सावन में यदि आपकी मनोकामना पूरी हो चुकी है, तो एक बार कावड़ यात्रा करके भगवान शिव के प्रति आभार व्यक्त करना निश्चित रूप से पुण्यदायी माना जाएगा।
