
ईरान और इजराइल के बीच जारी युद्ध अब और व्यापक होता नजर आ रहा है। संघर्ष के 28वें दिन यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोही भी इस जंग में शामिल हो गए हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।
इजराइल पर दागी बैलिस्टिक मिसाइल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन में सक्रिय हूती ने करीब 2000 किलोमीटर दूर इजराइल के दक्षिणी शहर बेर्शेबा को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल दागी. इजराइली सेना ने बताया कि मिसाइल का समय रहते पता लगा लिया गया और एयर डिफेंस सिस्टम ने उसे हवा में ही नष्ट कर दिया। इस हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
जंग में पहली बार यमन से सीधा हमला
मौजूदा संघर्ष के दौरान यह पहला मौका है जब यमन से सीधे इजराइल पर मिसाइल दागी गई है। इससे पहले हूती समूह नवंबर 2023 में गाजा युद्ध के दौरान इजराइल और समुद्री जहाजों को निशाना बना चुका है।
UAE में मिसाइल मलबे से 5 भारतीय घायल
संयुक्त अरब अमीरात में इंटरसेप्ट की गई बैलिस्टिक मिसाइलों के मलबे गिरने से पांच भारतीय नागरिक घायल हो गए हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इनमें दो की हालत गंभीर है. घटना अबू धाबी के खलीफा इकोनॉमिक जोन के पास हुई, जहां मलबे के गिरने से आग भी लग गई।
लेबनान में भी बढ़ा संघर्ष, हिजबुल्लाह सक्रिय
इस बीच लेबनान में हिजबुल्ला ने इजराइली सेना पर कई हमलों का दावा किया है। संगठन के अनुसार, सीमा क्षेत्र में टैंक और सैनिकों को निशाना बनाया गया. इजराइल ने पहले ही संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वह लितानी नदी तक सैन्य कार्रवाई बढ़ा सकता है।
परमाणु ठिकानों पर हमले जारी
IAEA के अनुसार, ईरान के बुशेहर परमाणु संयंत्र के आसपास हाल के दिनों में तीसरा हमला हुआ है। हालांकि अभी तक किसी रेडिएशन रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है. IAEA प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यदि रिएक्टर को नुकसान पहुंचता है, तो यह गंभीर परमाणु संकट बन सकता है।
तेल, शिपिंग और सुरक्षा पर खतरा
संघर्ष के विस्तार से होर्मुज जलडमरूमध्य और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र ने जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए टास्क फोर्स भी गठित किया है। ईरान, इजराइल, अमेरिका, यमन और लेबनान तक फैला यह संघर्ष अब बहु-क्षेत्रीय टकराव का रूप ले चुका है। लगातार हो रहे हमले, जवाबी कार्रवाई और नए मोर्चों के खुलने से यह जंग और जटिल होती जा रही है।मौजूदा हालात संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों पर पड़ेगा।
