Himachal Pradesh news: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू वर्षों से चली आ रही 17 मार्च की परंपरा को तोड़ते हुए इस बार 20 मार्च को बजट पेश करेंगे. मुख्यमंत्री सुक्खू के इस फैसले से हिमाचल प्रदेश की सियासत में इस बार बजट से पहले ही हलचल तेज हो गई है. गौरतलब है कि 2022 में प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद से वे हर साल 17 मार्च को ही बजट पेश करते आ रहे थे. हालाँकि, उनका इस साल 20 मार्च को बजट पेश करने का निर्णय केवल कैलेंडर का फेरबदल नहीं, बल्कि वित्तीय परिस्थितियों से जुड़ा अहम संकेत माना जा रहा है.

बजट को 30 मार्च से पहले करना है पारित
संसदीय कार्यमंत्री हर्ष वर्धन चौहानने बताया कि विधानसभा सत्र का दूसरा चरण प्रदेश में 18 मार्च से शुरू होगा. 19 मार्च को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी और उसी दिन शाम को मुख्यमंत्री धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब प्रस्तुत करेंगे. इसके पश्चात 20 मार्च को बजट पेश किया जाएगा, जबकि 23, 24 और 25 मार्च को बजट पर विस्तृत चर्चा होगी. बजट को 30 मार्च से पहले पारित किया जाना है, जिसकी अंतिम तिथि विधानसभा अध्यक्ष जल्द तय करेंगे.
RDG बंद होने का पड़ा है सीधा असर
विशेषज्ञों की मानें तो इस साल का बजट कई मायनों में चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है. वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) में कटौती और इसके बंद होने का सीधा असर राज्य की वित्तीय सेहत पर पड़ सकता है। अब तक आय और व्यय के बीच बढ़ते अंतर को संतुलित करने में RDG अहम भूमिका निभाता रहा है, और इसके समाप्त होने से संसाधनों की नई व्यवस्था खड़ी करना हिमाचल सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.
हिमाचल में संसाधन हैं सीमित
बताते चलें कि पहाड़ी राज्य होने के कारण हिमाचल में संसाधन सीमित हैं, जबकि खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे हालातों में बजट तैयार करना मुख्यमंत्री के लिए एक कठिन परीक्षा माना जा रहा है. ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का दावा करने वाली सरकार के सामने अब उस बदलाव को बजट में दिखाने की चुनौती है.
सुक्खू ने बजट से पहले की केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाक़ात
बजट पेश करने के कुछ दिन पहले ही, 2 मार्च को मुख्यमंत्री सुक्खू ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर RDG बहाल करने की मांग उठाई. इसे राज्य की वित्तीय जरूरतों को केंद्र तक मजबूती से रखने का प्रयास माना जा रहा है.
