Himachal politics: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के हाल ही में दिए गए एक बयान ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। ‘पंजाब की खेती हिमाचल के पानी पर निर्भर’ कहकर सीएम सुक्खू ने न केवल पड़ोसी राज्यों को संदेश दिया, बल्कि जल संसाधनों पर रॉयल्टी की पुरानी मांग को भी नए सिरे से हवा दे दी है।
जल संसाधनों पर हक की मांग की तेज

शिमला स्थित राज्य सचिवालय में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश से निकलने वाली नदियों का पानी पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे प्रदेशों को लाभ पहुंचाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब आज देश का ‘फूड बाउल’ है, तो उसके पीछे हिमाचल के जल संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने दोहराया कि हिमाचल प्रदेश सरकार अपने हक के लिए लगातार प्रयासरत है और पानी पर रॉयल्टी की मांग इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
बयान से बढ़ी सियासी हलचल
सीएम सुक्खू के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष और पड़ोसी राज्यों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है। सूत्रों के अनुसार, जल बंटवारे और संसाधनों के अधिकार को लेकर नई बहस छिड़ने के संकेत मिल रहे हैं।
आर्थिक सुधारों को लेकर जताया CM सुक्खू ने भरोसा
मुख्यमंत्री सुक्खू ने आगे राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी भरोसा जताया। उन्होंने बताया कि सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठा रही है और आने वाले चार महीनों में हालात बेहतर होने की उम्मीद है। सीएम सुक्खू ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नीतिगत स्तर पर लगातार काम किया जा रहा है।
कर्मचारियों के वेतन पर क्या बोले CM?
सरकारी कर्मचारियों के स्थगित वेतन को लेकर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सही समय आने पर सभी बकाया राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम कर रही है और धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है। अंत में मुख्यमंत्री सुक्खू ने भरोसा जताया कि अगले 6-7 महीनों में हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और राज्य विकास के नए रास्ते पर आगे बढ़ेगा।
