Himachal news: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को उस वक्त एक दिलचस्प और अहम क्षण देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से खुद उनकी पत्नी और विधायक कमलेश ठाकुर ने पहली बार प्रश्न पूछा। देहरा से निर्वाचित विधायक कमलेश ठाकुर ने मछुआरों की आजीविका से जुड़े सिल्ट के गंभीर मुद्दे को उठाया, जिस पर मुख्यमंत्री ने त्वरित कार्रवाई करवाने का भरोसा दिलाया।
मछुआरों की परेशानी गूंजी विधानसभा में

विधायक ठाकुर ने नदियों और बांधों में बढ़ती सिल्ट के कारण मछुआरों को हो रही दिक्कतों का मुद्दा विधानसभा में उठाया। उन्होंने कहा कि यह समस्या सिर्फ देहरा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि सतलुज, ब्यास और अन्य नदियों के किनारे बसे कई क्षेत्रों में लोगों की आजीविका पर असर डाल रही है। इस मुद्दे का अन्य विधायकों ने भी समर्थन किया।
CM बोले- ‘समस्या का समाधान करेंगे’
मुख्यमंत्री सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि देहरा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के अधीन आता है, इसलिए इस विषय पर संबंधित प्राधिकरण के साथ समन्वय किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाएगी।
पौंग डैम में ड्रेजिंग की तैयारी
सीएम सुक्खू ने आगे स्पष्ट किया कि पौंग डैम में ड्रेजिंग की अत्यंत आवश्यकता है और इसके लिए सरकार को किसी अतिरिक्त अनुमति की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि ड्रेजिंग प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए जियो-मैपिंग करवाई जाएगी, जिससे सिल्ट हटाने का काम तेज हो सके।
प्रदेश के वन और खनन विभाग मिलकर करेंगे काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उन क्षेत्रों की पहचान कराएगी जहां अधिक मात्रा में सिल्ट जमा हो रही है। इस कार्य के लिए वन और खनन विभाग संयुक्त रूप से काम करेंगे। साथ ही, स्थानीय विधायक और जिला उपायुक्त भी इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
विपक्ष ने भी खड़े किये सवाल
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने ब्यास नदी में बार-बार हो रहे नुकसान और 2023 की आपदा के दौरान इस्तेमाल हुई मशीनरी पर सवाल उठाए। इसके जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चैनलाइजेशन के बजाय ड्रेजिंग पर फोकस कर रही है और यदि कहीं अनियमितता पाई जाती है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
सरकार का फोकस साफ़- मछुआरों की आजीविका बचाना
मुख्यमंत्री ने बताया कि सिल्ट से प्रभावित मछुआरों की भरपाई के लिए बजट में कई योजनाएं लाई गई हैं। सरकार का उद्देश्य नदियों और खड्डों से सिल्ट हटाकर प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करना और लोगों की आजीविका को सुरक्षित करना है।
