Himachal news: हाल ही में राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grant – RDG) समाप्त होने के फैसले के बाद हिमाचल प्रदेश की वित्तीय स्थिति पर गंभीर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। शनिवार को प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार और पड़ोसी राज्यों के सामने बहुउद्देश्यीय परियोजनाओं को लेकर स्पष्ट शर्तें रखते हुए कहा है कि जब तक हिमाचल प्रदेश को उसके बकाया अधिकार नहीं मिलते, तब तक राज्य आगामी जल परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाएगा।
RDG समाप्त होने से हो रहा 6000 करोड़ का वार्षिक नुकसान
जानकारी के अनुसार, हिमाचल प्रदेश को लंबे समय से केंद्र से मिलने वाला राजस्व घाटा अनुदान राज्य के बजट का अहम हिस्सा रहा है। यह अनुदान राज्य के कुल बजट का लगभग 12.71 प्रतिशत था। गौरतलब है कि 31 मार्च 2026 के बाद RDG समाप्त होने से हिमाचल को हर साल लगभग 6,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा। विशेषज्ञों की मानें तो अगले पांच वर्षों में यह घाटा 50,000 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच सकता है। इसी बीच पहले से ही एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के बोझ तले दबे राज्य के लिए यह स्थिति गंभीर चुनौती बन गई है। राज्य की वार्षिक उधारी सीमा भी केंद्र द्वारा 10,000 करोड़ रुपये तक तय की गई है।

खर्च और कर्ज के बीच बढ़ती खाई
हिमाचल राज्य की अनुमानित वार्षिक आय लगभग 42,000 करोड़ रुपये है, जबकि उसका वार्षिक खर्च 48,000 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा हर साल करीब 13,500 करोड़ रुपये कर्ज चुकाने में और लगभग 27,000 करोड़ रुपये वेतन व पेंशन पर खर्च होते हैं। राज्य के वित्त सचिव दिवेश कुमार ने इस स्थिति को “अत्यंत गंभीर” करार देते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 के बाद राज्य के लिए प्रशासन चलाना, सेवाएं देना और विकास कार्य जारी रखना बेहद मुश्किल हो सकता है।
पर्यावरणीय न्याय की उठाई गयी मांग
मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमालयी राज्यों के लिए 50,000 करोड़ रुपये के पर्यावरणीय कोष की भी मांग उठाई है। उनके अनुसार, हिमाचल प्रदेश देश के लिए विशाल वन क्षेत्र, ग्लेशियर और नदियों का संरक्षण करता है, लेकिन इसके बदले राज्य को पर्याप्त आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा।
उन्होंने आगे कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण भूस्खलन, बादल फटने और भारी बारिश जैसी प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता बढ़ रही है, जिससे राज्य पर आर्थिक और पर्यावरणीय दबाव बढ़ता जा रहा है।
किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं पर सुक्खू ने अपनाया सख्त रुख
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश किशाऊ और रेणुका बांध परियोजनाओं को तब तक आगे नहीं बढ़ाएगा, जब तक पड़ोसी राज्य भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) से जुड़े बकाया भुगतान को लेकर ठोस आश्वासन नहीं देते।
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने 2011 में हिमाचल प्रदेश को BBMB परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का फैसला सुनाया था। इसके बावजूद राज्य को अभी तक लगभग 4,500 करोड़ रुपये का बकाया नहीं मिला है।
