High Court in Bilaspur: बिलासपुर में हाईकोर्ट ने भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि यदि पत्नी बिना किसी ठोस कारण के अपने बच्चों और पति को छोड़कर जाती है, और किसी अन्य पुरुष के साथ समय बिताती है, तो वह सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है.और ये फैसला क्यों लिया गया है आईए जानते है।

1 लाख रुपए मासिक गुजारा भत्ता दिया जाए
बता दें की भिलाई निवासी महिला ने अपने पति के खिलाफ भरण-पोषण के लिए आवेदन लगाया था. मामले में पत्नी ने आरोप लगाया था कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी, और पति की सहमति से ही कोचिंग के सिलसिले में दिल्ली गई थी. उसने दावा किया कि पति का काम अच्छा है, और हर माह 3 लाख रुपए आय है, इसलिए उसे 1 लाख रुपए मासिक गुजारा भत्ता दिया जाए.
High Court in Bilaspur: इस पर महिला ने हाई कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया
जिसके बाद पति ने कोर्ट में पत्नी के दावों को खारिज किया और बताया कि 11 नवंबर 2022 को पत्नी बिना बताए घर से गहने, दस्तावेज और अपने 2 छोटे बच्चों को छोड़कर चली गई थी. पति ने गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी. बाद में पता चला कि वह 1 व्यक्ति और अपनी बहन के साथ फ्लाइट से दिल्ली गई थी, और वहां करीब 10-11 दिन रुकी थी. दुर्ग के फैमिली कोर्ट ने सबूतों के आधार पर पत्नी की अर्जी खारिज कर दी थी, इस पर महिला ने हाई कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया था.
हाई कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी
High Court in Bilaspur: इस मामले हाई कोर्ट ने कहा कि पत्नी ने बिना किसी पर्याप्त कारण के पति के घर और बच्चों को छोड़ा. इसके अलावा किसी अन्य पुरुष के साथ 10-11 दिन तक बाहर रहना और परिवार को सूचना न देना स्वैच्छिक परित्याग की श्रेणी में आता है. ऐसी स्थिति में सीआरपीसी की धारा 125(4) के तहत पत्नी भरण-पोषण की हकदार नहीं रह जाती. इस आधार पर हाई कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी है.
