Health Benefits of Javitri: भारतीय रसोई में कई मसाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी उपयोगी होते हैं। ऐसा ही एक मसाला है जवित्री (Mace), जिसे अंग्रेजी में “Mace” और संस्कृत में “जप्त्रिका” कहा जाता है। यह जायफल (Nutmeg) का ही हिस्सा होता है, लेकिन उससे अलग बनावट और गुणों में भी कुछ विशेष होता है।
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जवित्री स्वाद में तीखी, गर्म प्रकृति वाली और सुगंधित होती है। इसके औषधीय गुणों के कारण यह न केवल खाना स्वादिष्ट बनाती है, बल्कि कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने में भी मदद करती है। आयुर्वेद, यूनानी और चीनी चिकित्सा पद्धतियों में जवित्री का उपयोग सदियों से किया जा रहा है।
जवित्री क्या है?
जायफल के बीज को ढकने वाली लाल रंग की जालीदार परत होती है। जब जायफल पकता है, तो उसके चारों ओर यह पतली झिल्ली जैसे आवरण बन जाता है जिसे सुखाकर जवित्री तैयार की जाती है। इसका रंग हल्का पीला से लेकर गहरा नारंगी या लाल भी हो सकता है।
उपयोग: जवित्री में तेज सुगंध होती है और यह व्यंजनों को न केवल स्वादिष्ट बनाती है बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर होती है।

इसमें उपस्थित पोषक तत्व..
जवित्री में कई आवश्यक पोषक तत्व होते हैं जो स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं – फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटेशियम, आयरन, विटामिन A, C, और B-कॉम्प्लेक्स, एंटीऑक्सीडेंट्स, एंटी-इंफ्लेमेटरी यौगिक।
इसके प्रमुख फायदे…
पाचन में सुधार करें…
जवित्री में मौजूद यौगिक गैस, अपच और पेट फूलने की समस्याओं को दूर करने में सहायक होते हैं। यह पेट की मांसपेशियों को आराम देती है और भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करती है। इसका सेवन एसिडिटी, अपच, और कब्ज में बहुत लाभदायक है।
उपयोग: भोजन के बाद एक चुटकी जवित्री पाउडर को गर्म पानी के साथ लें सकते हैं।
हृदय स्वास्थ्य को रखे दुरुस्त…
जवित्री में मौजूद पोटेशियम, मैग्नीशियम और फाइबर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। यह कोलेस्ट्रॉल को कम करता है और रक्त प्रवाह को बेहतर बनाता है, जिससे हृदय रोगों की संभावना घटती है।
डायबिटीज को नियंत्रित करने में सहायक…
जवित्री का उपयोग ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में भी किया जाता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स इंसुलिन की सक्रियता को बेहतर करते हैं और शरीर में शर्करा के स्तर को संतुलित रखते हैं।
इम्यूनिटी को करता है मजबूत…
जवित्री में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट्स और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं। यह सर्दी-खांसी, वायरल संक्रमण और मौसमी बीमारियों से लड़ने में सहायक होती है।
दांत और मसूड़ों के लिए लाभकारी…
जवित्री में पाए जाने वाले एंटीसेप्टिक गुण मुंह की दुर्गंध, मसूड़ों की सूजन और दांतों की सड़न से बचाते हैं। इसे माउथ फ्रेशनर के रूप में भी प्रयोग किया जाता है।
उपयोग: आप जवित्री पाउडर को नीम के दातुन या टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करें।
तनाव और अनिद्रा में लाभकारी…
जवित्री की सुगंध और इसके रासायनिक तत्व दिमाग को शांत करने में मदद करते हैं। यह तनाव, चिड़चिड़ापन और अनिद्रा जैसी मानसिक समस्याओं को कम करने में उपयोगी है।
उपयोग: रात को सोने से पहले गुनगुने दूध में एक चुटकी जवित्री पाउडर मिलाकर पिएं।
त्वचा को बनाती है चमकदार..
जवित्री के एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण मुंहासों, झाइयों, और स्किन इंफेक्शन को कम करने में मदद करते हैं। यह त्वचा को साफ और चमकदार बनाती है।
फेस पैक: जवित्री पाउडर में शहद और हल्दी मिलाकर फेस पैक बनाएं और चेहरे पर लगाएं।
सांस की बीमारियों में राहत…
जवित्री का प्रयोग खांसी, दमा और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों में भी किया जाता है। इसके गर्म प्रभाव के कारण यह गले की खराश और बलगम से राहत दिलाने में कारगर है।
उपयोग: जवित्री और अदरक को उबालकर उसकी भाप लें या चाय में डालकर सेवन करें।

जवित्री का सेवन कैसे करें?
1. पाउडर के रूप में: दूध, चाय या गर्म पानी में मिलाकर
2. खाने में मसाले के तौर पर: पुलाव, मिठाई, ग्रेवी, बिरयानी में
3. तेल के रूप में: अरोमाथेरेपी और मालिश के लिए
4. फेस पैक में: त्वचा संबंधी समस्याओं में उपयोग
सेवन में सावधानी…
जवित्री शक्तिशाली मसाला है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। अधिक मात्रा में लेने से सिरदर्द, चक्कर, या एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
किन लोगों को नहीं करना चाहिए सेवन?
1. गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं
2. छोटे बच्चे (डॉक्टर की सलाह से दें)
3. जिन्हें मसालों से एलर्जी हो
