रोना बंद करो, गर्व करो-पत्नी के साहस ने सबकी आंखें भिगो दीं
Havaldar Shailendra Singh: जम्मू-कश्मीर के डोडा में देश की रक्षा करते हुए अपने सर्वोच्च बलिदान देने वाले हवलदार शैलेंद्र सिंह भदौरिया शनिवार को अपने पैतृक गांव चितावली (अटेर) में पंचतत्व में विलीन हो गए. शहीद का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ हुआ, और इस दौरान सबसे दिल को छूने वाला दृश्य तब आया जब उनके 6 वर्षीय बेटे भावेश ने नम आंखों से पिता को मुखाग्नि दी।
गाल चूमकर और बलाएं लेकर विदाई
अंतिम संस्कार के दौरान शिवानी, शैलेंद्र की पत्नी, ने अदम्य साहस का परिचय दिया। वह अपने पति के पार्थिव शरीर के पास रोते-बिलखते लोगों को ढांढस बंधाती रहीं और कहती रहीं, “रोना-धोना बंद करो, कुछ नहीं होगा. उन्होंने अपने पति के गालों को चूमते हुए और उनकी बलाएं लेकर उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद कई सैन्य अधिकारी भी भावुक हो गए, और कई की आंखें नम हो गईं।
वीरों का परिवार: तीन पीढ़ियों की सेना सेवा
शैलेंद्र का परिवार वीरों की परंपरा से जुड़ा है। उनके दादाजी भी सेना में थे और 1972 में शहीद हुए थे। शैलेंद्र के तीन भाई भी सेना में हैं, और उनके पिता हनुमत सिंह अपने बेटों की देश सेवा से गर्व महसूस करते हैं। बड़े भाई देवसिंह सेना से रिटायर हैं। यह परिवार सच में देशभक्ति का जीता-जागता उदाहरण है।
पत्नी ने चार दिन पहले हुई आखरी बात बताया सपना
शैलेंद्र की पत्नी ने मीडिया को बताया कि चार दिन पहले उनका फोन आया था। शैलेंद्र ने अपने परिवार और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था, मुझे बहुत डर लग रहा है, कुछ होने वाला है। उस रात उन्होंने एक सपना भी देखा, जिसे उन्होंने शिवानी के साथ साझा किया। आज यही उनकी अंतिम बातचीत साबित हुई।
Havaldar Shailendra Singh: फूलों की बारिश और ‘अमर रहे’ के नारे
अंतिम यात्रा के दौरान जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर तरफ फूलों की वर्षा हो रही थी और लोग जोर-जोर से नारे लगा रहे थे”हवलदार शैलेंद्र सिंह अमर रहें! ब्रिगेडियर अमित वर्मा ने शहीद को श्रद्धांजलि दी और परिवार को हर संभव सैन्य सहायता का आश्वासन दिया। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।
