Haryana news: हरियाणा की भाजपा सरकार अपना इस साल का बजट पेश करने की पूरी तैयारी में है. हालाँकि, सरकार के सामने भारी कर्ज, बढ़ते घाटे और सीमित संसाधनों जैसी समस्याएं चुनौती पेश कर रही हैं. बजट से पहले वित्त विभाग के आंतरिक आकलन और जनवरी 2026 तक के लेखा आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि सरकार के सामने विकास योजनाओं से अधिक वित्तीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती है.

आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पर खड़े हो रहे सवाल
वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंत तक हरियाणा का सकल घरेलू उत्पाद लगभग 13.67 लाख करोड़ रुपये आंका गया है. हालांकि यह आंकड़ा आकार में बड़ा है, परन्तु वृद्धि दर में अपेक्षित स्थिरता नज़र आती हुई नहीं दिख रही.
विशेषज्ञों की मानें तो औद्योगिक निवेश अनुमानित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है, जबकि सेवा क्षेत्र की वृद्धि मुख्य रूप से शहरी क्षेत्रों तक सीमित बताई जा रही है. सरकार के प्रति व्यक्ति आय बढ़ने के दावों के बावजूद महंगाई और बेरोजगारी के कारण आम नागरिक को राहत सीमित ही महसूस हो रही है.
हरियाणा पर क़र्ज़ 3.50 लाख करोड़ से ऊपर पहुंचा
आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2026 तक राज्य पर कुल कर्ज 3.50 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 25 से 27 प्रतिशत है. वित्तीय विशेषज्ञ इसे जोखिम की सीमा के करीब मान रहे हैं. ब्याज भुगतान का बोझ लगातार बढ़ रहा है, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं के लिए संसाधन सीमित हो सकते हैं.
राजस्व और व्यय में पैदा हुआ असंतुलन
जनवरी 2026 तक कुल राजस्व प्राप्तियां वार्षिक अनुमान का करीब 75 प्रतिशत ही हासिल कर पाई हैं. केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता अनुमान के मुकाबले काफी कम रही है. वहीं दूसरी ओर, राजस्व व्यय 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है. वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर ही 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, जिनमें लगभग 19,400 करोड़ रुपये ब्याज भुगतान शामिल है.
घाटा और सरकारी गारंटी चिंता का विषय
आंकड़े आगे यह बयां करते हैं कि जनवरी 2026 तक राजस्व घाटा 9,160 करोड़ रुपये दर्ज किया गया है और पूरे वर्ष में इसके 27,700 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. वित्तीय घाटा भी 29,600 करोड़ रुपये के आसपास पहुंच चुका है. वहीं, बिजली वितरण कंपनियों समेत अन्य संस्थाओं के लिए दी गई सरकारी गारंटी 6,470 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है.
कुल मिलाकर, बजट 2026–27 नायब सैनी सरकार के लिए विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन साधने की बड़ी परीक्षा साबित होगा. विपक्ष जहां इसे कर्ज आधारित बजट बता रहा है, वहीं सरकार के सामने भरोसा कायम रखने की चुनौती भी कम नहीं है.
