Weight loss Injection Effect: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर कोई फिट और अच्छा दिखने के चक्कर में पतला होने के लिए हमेशा नए-नए नुस्खे और दवाईओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में कई लोग GLP-1 का उपयोग करते है। इससे वजन जल्दी कम हो जाता है। लेकिन क्या आपको पता है, जितना जल्दी इससे वजन कम होता है। इसका डोज न लेने से उतना जल्दी वजन बढ़ भी जाता हैं। ऐसे में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि दवाएं बंद करने से मेटाबोलिक सुधार भी कम हो जाते हैं, इंसान फिर से मोटा हो जाता है। इससे स्वास्थ का भी खतरा होता है।
दवा बंद करने से बढ़ जाएगा वजन
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के किए गए नए अध्ययन से पता चला है कि, GLP-1 आधारित दवाओं का इलाज बंद करने के बाद कई व्यक्ति तेजी से वजन बढ़ा लेते हैं। यह अध्ययन द बीएमजे जर्नल में प्रकाशित हुआ है, और इससे वजन घटाने वाले लोकप्रिय इंजेक्शनों को बंद करने के बाद होने वाले प्रभावों पर चिंता बढ़ गई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि दवाएं बंद करने से मेटाबोलिक सुधार भी कम हो जाते हैं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकता है।

दवाओं का परिचय और प्रभाव
सेमाग्लुटाइड (ओजेम्पिक जैसे ब्रांड नामों से उपलब्ध) और टिरजेपाटाइड (माउंजारो के रूप में बिकने वाला) जैसे इंजेक्टेबल दवाओं ने पिछले कुछ वर्षों में मोटापे के इलाज में काफी बदलाव लाया है। ये दवाएं भूख को दबाती हैं, पेट की खाली होने की प्रक्रिया को धीमा करती हैं, और मेटाबोलिक नियंत्रण में सुधार करती हैं। लाखों मोटापे से पीड़ित लोगों ने इन दवाओं की मदद से अपना वजन कम किया है, लेकिन हमेशा पतले रहने के लिए ये दवा लगातार लेनी पड़ती है।
दवा बंद तो वजन बढ़ा
शोधकर्ताओं ने 37 क्लिनिकल ट्रायल्स का विश्लेषण किया, जिसमें 9,000 से अधिक युवा शामिल थे।
अध्ययन के अनुसार, दवा बंद करने के बाद व्यक्ति का औसतन 0.4 किलोग्राम प्रति माह की दर से वजन बढ़ता जाता हैं। सेमाग्लुटाइड और टिरजेपाटाइड जैसे नए GPL-1 दवाओं के मामले में यह दर दोगुनी यानी 0.8 किग्रा प्रति माह तक पहुंच सकती है, दावा किया गया कि, जो व्यक्ति ये दवाएं लेते हैं। दवा बंद होने के लगभग 1.7 वर्षों के भीतर अपने पहले के वजन पर वापस लौट जाते हैं, जिससे वजन घटाने की कोशिश नाकाम हो जाती है।

STEP-1 एक्सटेंशन ट्रायल के सबूत
STEP-1 एक्सटेंशन ट्रायल से मिले आंकड़ों के हिसाब से दवा का उपयोग करने वालों ने सेमाग्लुटाइड के 68 सप्ताह के इलाज के दौरान अपने शरीर के वजन का 17.3% कम किया था, दवा बंद करने के 1 साल के अंदर ही वो वापस पहले जैसे हो गए।
इसके अलावा, उनके रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और रक्त शर्करा स्तर में हुए सुधार भी धीरे-धीरे कम होने लगे, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
क्रॉनिक बीमारी के रूप में देखते हैं, जिसके लिए लंबे समय तक प्रबंधन की जरूरत होती है, न कि सिर्फ अल्पकालिक इलाज की। दवाएं बंद करने पर शरीर के प्राकृतिक भूख और मेटाबोलिक प्रक्रियाएं वापस सामान्य हो जाती हैं, जिससे भूख बढ़ती है और कैलोरी सेवन अधिक होता है।
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि स्थायी परिणामों के लिए दवाओं के साथ-साथ स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, व्यवहारिक समर्थन और चिकित्सकीय निगरानी को अपनाना जरूरी है। इससे वजन नियंत्रण में लंबे समय तक सफलता मिल सकती है।
