Halali forest: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज (सोमवार) दोपहर 3:45 बजे रायसेन वन मंडल के हलाली डैम वनक्षेत्र में पांच गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ेंगे। इनमें 1 सिनेरियस और 4 लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध शामिल हैं। लगभग डेढ़ साल के सिनेरियस गिद्ध (काला गिद्ध) को 19 दिसंबर 2025 को विदिशा जिले के सिरोंज से बचाया गया था। यह प्रजाति दुनिया के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षियों में से एक मानी जाती है और भारत में शीतकालीन आगंतुक के रूप में देखी जाती है।

साल 2025 में विदिशा, मंडला, बैतूल और सिवनी से चार लॉन्ग-बिल्ड गिद्धों को रेस्क्यू किया गया था। और इनका उपचार और वैज्ञानिक निगरानी वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में की गई। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में छोड़ने के लिए उपयुक्त घोषित किया गया।
आईयूसीएन की ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ श्रेणी में सूचीबद्ध
जानकारी के अनुसार सभी गिद्धों पर जीपीएस टैग लगाए गए हैं, जिससे रिहाई के बाद उनकी गतिविधियों और व्यवहार पर नजर रखी जा सकेगी। लॉन्ग-बिल्ड गिद्ध प्रजाति को पशुओं में इस्तेमाल होने वाली डायक्लोफेनेक दवा के कारण भारी कमी का सामना करना पड़ा है और यह आईयूसीएन की ‘गंभीर रूप से लुप्तप्राय’ श्रेणी में सूचीबद्ध है।
Halali forest: गणना में कुल 1532 गिद्ध दर्ज
हाल ही में हुए गिद्ध गणना में रायसेन वन मंडल ने एक नया रिकॉर्ड बनाया है। इस गणना में कुल 1532 गिद्ध दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की 951 की संख्या से 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं।
गणना के पहले दिन 1187 गिद्ध देखे गए, दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर 1306 हो गई और तीसरे दिन 1532 गिद्ध दर्ज किए गए। सबसे अधिक 899 गिद्ध रायसेन पश्चिम परिक्षेत्र में मिले, जो कुल संख्या का 60 प्रतिशत से अधिक है।
इस गणना के दौरान मध्यप्रदेश में पाई जाने वाली सभी सात गिद्ध प्रजातियां दर्ज की गईं। इनमें लॉन्ग-बिल्ड, व्हाइट रम्प्ड, हिमालयन, यूरेशियन, रेड हेडेड और इजिप्शियन गिद्ध शामिल हैं। भारत में गिद्धों की कुल नौ प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि विश्वभर में इनकी 23 प्रजातियां मौजूद हैं।
12,710 के आंकड़े के साथ एमपी देश में अव्वल
Halali forest: वर्ष 2025 की गणना में मध्यप्रदेश में 12,710 गिद्ध दर्ज किए गए थे। इसी वजह से प्रदेश को देश का अग्रणी ‘गिद्ध राज्य’ माना जाता है।
वन विभाग का मानना है कि रीवाइल्डिंग, वैज्ञानिक मॉनिटरिंग और दवाओं के नियमन जैसे कदमों से गिद्धों की संख्या में निरंतर सुधार हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, गिद्ध प्राकृतिक पारितंत्र की ‘स्वच्छता सेना’ हैं और उनकी बढ़ती संख्या पर्यावरणीय संतुलन के लिए सकारात्मक संकेत है।
